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गठिया के मरीजों का दर्द बढ़ा रहा प्रदूषण

गठिया के मरीजों का दर्द बढ़ा रहा प्रदूषण

संक्षेप: दिल्ली में प्रदूषण के कारण गठिया के मरीजों का दर्द बढ़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से स्वस्थ लोगों को भी ऑटोइम्यून रोग हो सकते हैं। प्रदूषण से अस्थमा, हृदय रोग और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी हो रही हैं। सुबह के समय प्रदूषण का स्तर अधिक होता है, जिससे मरीजों को बाहर सैर करने से बचना चाहिए।

Mon, 3 Nov 2025 07:12 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। प्रदूषण शरीर के हर हिस्से को प्रभावित कर रहा है। दिल्ली में पिछले कई दिनों से प्रदूषण अधिक होने से गठिया के मरीजों का भी दर्द बढ़ने लगा है। इस वजह से गठिया के मरीज बढ़ी हुई बीमारी के साथ अस्पताल पहुंचने लगे हैं। डॉक्टर बताते हैं कि लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहने से स्वस्थ लोगों को भी ऑटोइम्यून रोग हो सकता है। ऐसे में दिल्ली में रहने वाले लोगों को गठिया और ऑटोइम्यून की कई अन्य बीमारियां होने का भी खतरा है। एम्स के मेडिसिन विभाग में एडिशनल प्रोफेसर डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि प्रदूषण के कारण अस्थमा, सीओपीडी (क्रोनिकल ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) जैसी सांस की बीमारियां तो ही रही हैं, इससे उच्च रक्तचाप व हृदय रोग भी हो रहा है।

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इसके अलावा शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी प्रभावित होती है। इस वजह से गठिया व ल्यूपस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियां भी होती हैं। क्या है ऑटोइम्यून बीमारियां डॉक्टर बताते हैं कि ऑटोइम्यून रोग में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक सक्रिय हो जाती है और अपने शरीर की कोशिकाओं को ही नुकसान पहुंचाने लगती है। इस वजह से शरीर में सूजन सहित कई अन्य परेशानियां होने लगती हैं। एम्स के रुमेटोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. उमा कुमार ने बताया कि अध्ययन में यह बात साबित हो चुकी है कि वातावरण में पीएम 2.5 का स्तर अधिक होने पर शरीर के आंतरिक हिस्सों में भी सूजन होने लगती है और गठिया की बीमारी बढ़ जाती है। पहले गठिया के जिन मरीजों की बीमारी स्थिर थी और मरीज ठीक थे अब पिछले कुछ दिनों से वे बढ़े हुए लक्षण के साथ इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। प्रदूषित आबोहवा में लंबे समय तक रहने से स्वस्थ लोगों को भी जोड़ों में दर्द व गठिया की बीमारी हो सकती है। सुबह के वक्त प्रदूषण का स्तर अधिक होता है। क्योंकि इस दौरान प्रदूषक तत्व वातावरण में कम ऊंचाई पर मौजूद होते हैं। इस वजह से सुबह में खुली जगह में टहलने पर प्रदूषण का दुष्प्रभाव सबसे अधिक होता है। लिहाजा, मौजूदा समय में गठिया के मरीजों को सुबह सैर पर नहीं जाना चाहिए। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए ताकि शरीर का हाइड्रेशन ठीक रहे। प्रदूषण का मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर पड़ता है। प्रदूषण अधिक होने पर नींद नहीं आने की समस्या होती है। इस वजह से लोगों को चिड़चिड़ापन की समस्या होती है। - डॉ. उमा कुमार, प्रोफेसर, रुमेटोलॉजी विभाग, एम्स