विश्लेषण : विपक्ष के झटके से सत्ता पक्ष को राजनीतिक फायदे की उम्मीद

Madan Jaira हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली में 33 प्रतिशत महिला आरक्षण विधेयक लोकसभा में गिर गया है, जिससे राजनीतिक माहौल गरमाने की संभावना है। सरकार ने विपक्ष को महिला विरोधी करार दिया, जबकि विपक्ष इसे अपनी बड़ी जीत मान रहा है। सरकार को संविधान संशोधन के लिए आवश्यक बहुमत नहीं मिला, और विपक्ष ने एकजुटता दिखाई।

विश्लेषण : विपक्ष के झटके से सत्ता पक्ष को राजनीतिक फायदे की उम्मीद

नई दिल्ली। लोकसभा एवं विधानसभाओं में 33 फीसदी महिला आरक्षण को जल्दी लागू करने से जुड़े विधेयकों के लोकसभा में गिर जाने से आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीति गरमा सकती है। इस विधेयक को समर्थन नहीं करने पर सत्ता पक्ष ने विपक्ष को महिला विरोधी करार दिया है। साथ ही उसे इसके राजनीतिक फायदे की भी उम्मीद है। वहीं, विपक्ष इसे सत्तापक्ष की बड़ी राजनीतिक हार मान रहा है। सरकार के पास लोकसभा और राज्यसभा में संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराने के लिए अपेक्षित दो-तिहाई बहुमत नहीं है। ऐसी स्थिति में विपक्ष को भरोसे में लेकर चलना होता है।

इस मामले में विपक्ष चाहता था कि चुनाव के बाद यानी 30 अप्रैल के बाद इस मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक हो और आगे बढ़ा जाए लेकिन सरकार उसे नजरंदाज कर आगे बढ़ गई। नतीजा यह हुआ कि विपक्ष ने इसे प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया। हालांकि इसे पारित नहीं कराने से विपक्ष को कोई राजनीतिक फायदा मिलता हुआ नहीं दिख रहा है।दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में बोल दिया था कि यदि विपक्ष इसका विरोध करता है तो उनका फायदा है। समर्थन करता है तो किसी का फायदा नहीं है। अब जब विधेयक गिर चुका है तो भाजपा पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव में इसे विपक्ष के खिलाफ इस्तेमाल करेगी।तमिलनाडु में डीएमके इस विधेयक के खिलाफ माहौल बना चुकी है लेकिन पश्चिम बंगाल में भाजपा इस मुद्दे पर तृणमूल कांग्रेस की घेराबंदी कर सकती है तथा इसका कुछ हद तक इसका राजनीतिक लाभ भी उसे मिल सकता है। ज्यादा लाभ इसलिए नहीं मिल पाएगा क्योंकि विपक्ष के पास यह तर्क बचता है कि जब 2023 में नारी शक्ति वंदन विधेयक आया था जो एक संविधान संशोधन विधेयक था तो विपक्ष ने उसका खुलकर समर्थन किया था।एक बात और, लोकसभा में 11 साल में पहली बार विपक्ष सरकार को बड़ा झटका देने में कामयाब रहा है। इस बार विपक्ष की एकजुटता दिखी है। उसका कुल संख्या बल 235-240 के करीब है जिसमें से 230 ने एकजुट होकर विरोध में वोट किया। किसी विधेयक पर लोकसभा में विपक्ष पहली बार इतना एकजुट दिखा है। सरकार विपक्षी दलों की एकजुटता में सेंध नहीं लगा पाई। इससे पहले 2015 में सरकार संख्या बल के अभाव में राज्यसभा में भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन से पीछे हटी थी।दूसरे, इससे सरकार को यह भी संकेत है कि भविष्य में यदि वह विपक्ष को भरोसे में लिए बगैर संविधान संशोधन विधेयक लेकर आई तो उसका भी वही हश्र होगा। वन नेशन वन इलेक्शन एक ऐसा ही विधेयक लंबित है जिसका विपक्ष शुरू से विरोध कर रहा है। इस प्रकरण से उसका भी भविष्य तय माना जा रहा है।एक प्रश्न यह उठता है कि सरकार के पास अब क्या विकल्प हैं। नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत 2026 की जनगणना के आधार पर आरक्षण लागू करने में कोई अड़चन नहीं है। यह जरूर है कि यदि जनगणना के आंकड़ों में विलंब होता है तो फिर 2029 में महिला आरक्षण लागू करना मुश्किल हो सकता है और 2034 का इंतजार करना पड़ सकता है।दूसरे, एक विकल्प यह है कि सरकार विपक्ष को भरोसे में लेकर एक बार फिर से प्रयास कर सकती है, हालांकि अब यह कार्य कठिन होगा। विपक्ष का विरोध परिसीमन को लेकर है। इसलिए बिना परिसीमन और संख्या बढ़ाए मौजूदा सीटों पर ही इसे लागू करने का विकल्प भी है।

Madan Jaira

लेखक के बारे में

Madan Jaira

प्रिंट मीडिया में 32 साल से कार्य करने का अनुभव। करीब 26 सालों से नेशनल पालिटिकल ब्यूरो में सक्रिय। केंद्र सरकार के मंत्रालयों, राजनीतिक दलों, क्लाईमेट चेंज, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे विषयों पर लंबे समय तक कार्य किया। मौजूदा समय में रक्षा तथा विदेश मामलों पर काम का लंबा अनुभव। साथ में राजनीतिक घटनाओं का विश्लेषण। संसद की रिपेर्टिंग का भी 20 सालों का अनुभव करीब दस सालों से नेशनल ब्यूरो का संचालन। देश के बाहर भी अनेक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलनों के कवरेज का अनुभव।

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