स्वायत्तता पर खतरे की आशंका जताकर एफसीआरए विधेयक पर विरोध
केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित एफसीआरए संशोधन विधेयक 2026 के खिलाफ राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध बढ़ रहा है। विपक्ष और ईसाई संगठनों का कहना है कि यह विधेयक सरकार को अत्यधिक अधिकार देता है, जिससे अल्पसंख्यक संस्थाओं की संपत्तियों पर नियंत्रण बढ़ेगा। वर्तमान में विधेयक पर चर्चा टल चुकी है।

केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित विदेशी अंशदान विनियमन संशोधन (एफसीआरए) विधेयक, 2026 को लेकर देश में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर विरोध सामने आ रहा है। बजट सत्र के दौरान लोकसभा में 25 मार्च को पेश किए गए इस विधेयक पर विपक्ष के हंगामे के चलते चर्चा और पारित होना फिलहाल टाल दिया गया था, लेकिन इसको लेकर विपक्ष की कई तरह की आशंकाएं बरकरार हैं। विपक्ष के अलावा देश के प्रमुख ईसाई संगठनों ने विधेयक को कार्यपालिका का अतिक्रमण बताया है। उनका कहना है कि इससे केंद्र सरकार को अत्यधिक और व्यापक अधिकार मिल जाते हैं। विधेयक में प्रस्ताव है कि यदि किसी एनजीओ का एफसीआरए लाइसेंस निलंबित, रद्द या नवीनीकरण न हो, तो सरकार द्वारा नामित प्राधिकारी उसकी संपत्तियों पर नियंत्रण कर सकता है।
विरोधियों का आरोप है कि इससे धार्मिक और अल्पसंख्यक संस्थाओं की संपत्तियों और संचालन पर सरकारी हस्तक्षेप बढ़ेगा। सूत्रों का कहना है कि विपक्ष के कड़े विरोध के चलते विधेयक पर फिलहाल रोक लग गई है, लेकिन जरूरी विचार-विमर्श के बाद सरकार इसे दोबारा लेकर आएगी।अल्पसंख्यक संस्थाओं को लेकर आशंकाकेरल और तमिलनाडु में विशेष रूप से यह आशंका जताई जा रही है कि इस कानून का इस्तेमाल चर्च और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों की संपत्तियों पर कब्जा करने के लिए किया जा सकता है। विधेयक सरकार को अधिकार देता है कि वह किसी संस्था का लाइसेंस रद्द करे या नवीनीकरण से इनकार कर सके। विरोधियों के अनुसार यह प्रावधान मनमाने निर्णयों का रास्ता खोल सकता है।जांच प्रक्रिया पर नियंत्रणप्रस्तावित संशोधन के तहत किसी भी राज्य सरकार या कानून प्रवर्तन एजेंसी को एफसीआरए से जुड़े मामलों की जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होगी। इसे संघीय ढांचे के खिलाफ बताया जा रहा है।‘की फंक्शनरी’ की व्यापक परिभाषाविधेयक में ‘की फंक्शनरी’ (प्रमुख पदाधिकारी) की परिभाषा को विस्तृत करते हुए ट्रस्टी, साझेदार और प्रबंधन से जुड़े अन्य लोगों को भी शामिल किया गया है। इससे अधिक लोगों पर कानूनी जवाबदेही बढ़ेगी। इसे कई लोग कठोर और दंडात्मक मान रहे हैं। एनजीओ की संपत्तियों के प्रबंधन के लिए नामित प्राधिकारी का प्रावधान किया गया है। वहीं, सरकार का कहना है कि यह विधेयक विदेशी फंड के प्रवाह और उपयोग में पारदर्शिता बढ़ाने, दुरुपयोग रोकने और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के उद्देश्य से लाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि विधेयक पर काफी विमर्श किया गया है। उपयोगी सुझावों को सरकार अब भी शामिल करने के लिए तैयार है।
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