आयात बिल घटने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना

हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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शोल्डर --- विशेषज्ञों के मुताबिक प्रधानमंत्री की अपील का सकारात्मक असर पड़ने की उम्मीद, रुपये

 आयात बिल घटने से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की संभावना

नई दिल्ली, एजेंसी। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल के बढ़ते संकट को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को देशवासियों से अहम अपील की। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बड़ी संख्या में लोग इसका पालन करते हैं तो इसका सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। खासकर विदेशी मुद्रा भंडार, आयात बिल, महंगाई और रुपये की स्थिति पर इसका सकारात्मक संभावित प्रभाव देखने को मिल सकता है। साथ ही आर्थिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिल सकती है। सोने का आयात बढ़ा रहा दबाव

सोने का आयात

भारत दुनिया के सबसे बड़े सोना उपभोक्ता देशों में शामिल है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2025-26 में देश का सोना आयात 24 प्रतिशत बढ़कर रिकॉर्ड 71.98 अरब डॉलर तक पहुंच गया। अप्रैल-फरवरी 2025-26 के दौरान ही सोना आयात लगभग 69 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष से करीब 29 प्रतिशत अधिक था। इसी तरह, चांदी का आयात बीते वित्त वर्ष में लगभग 150 प्रतिशत बढ़कर 12 अरब डॉलर हो गया। मात्रा के लिहाज से यह 42 प्रतिशत बढ़कर 7,334.96 टन रहा। इन कीमती धातुओं के आयात में वृद्धि से देश का व्यापार घाटा वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 333.2 अरब डॉलर पहुंच गया।

तेल आयात पर अधिक निर्भरता

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, देश की कच्चे तेल पर आयात निर्भरता 85 से 89 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। भारत हर दिन लगभग 55 लाख बैरल तेल की खपत करता है। सरकार के अनुसार, देश अब करीब 40 देशों से तेल खरीद रहा है ताकि किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हो सके। लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से तेल आपूर्ति और कीमत दोनों पर दबाव बना हुआ है। हाल में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 110 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया था। आंकड़ों के अनुसार, भारत को पेट्रोलियम उत्पादों पर प्रतिदिन लगभग 1,600 से 1,700 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ते हैं। ऐसी स्थिति में अगर देश में ईंधन की खपत कुछ कम होती है, तो आयात बिल पर दबाव कम हो सकता है।

रुपये पर दबाव कम होगा

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक संकट के समय मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार किसी भी देश के लिए सुरक्षा कवच की तरह काम करता है। भारत को तेल और सोना खरीदने के लिए भारी मात्रा में डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। इससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया भी कमजोर होता है। हाल के दिनों में रुपया अपने अब तक के सबसे निचले स्तर पर गोता लगा चुका है। फिलहाल रुपया डॉलर के मुकाबले 95 रुपये के आसपास बना हुआ है। अगर ईंधन और सोने का आयात कम होता है, तो डॉलर की मांग घट सकती है। इससे विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने और रुपये को मजबूती देने में मदद मिल सकती है।

कितना बढ़ा व्यापार घाटा

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात 0.93 प्रतिशत बढ़कर अबतक के उच्चतम स्तर 441.78 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि आयात 7.45 प्रतिशत बढ़कर 775 अरब डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष के दौरान सोने और चांदी के आयात में उछाल के कारण व्यापार घाटा बढ़कर 333.2 अरब डॉलर रहा

सोने का कितना आयात

वित्त वर्ष आयात (अरब डॉलर में) मात्रा (टन में)

2025-26 71.98 अरब डॉलर 721.03

2024-25 58 अरब डॉलर 757.09

2023-24 45.54 अरब डॉलर 795.2

2022-23 35 अरब डॉलर 678.3

अप्रैल में किसकी कितनी खपत

डीजल 82.82 लाख टन

पेट्रोल 36.7 लाख टन

विमानन ईंधन 7.61 लाख टन

एलपीजी 23.79 लाख टन

यह चुनौतियां बरकरार रहेंगी

1. कच्चा तेल : कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कारकों पर तय होती हैं। यदि पश्चिम एशिया में तनाव बरकरार रहता है और कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक 95 डॉलर के आसपास बनी रहती हैं तो तेल कंपनियां पर और दबाव बढ़ सकता है?

2. सोना : सोने की कीमतें भी भू-राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करती हैं। तनाव बढ़ने की स्थिति में सोने की कीमतों में उछाल देखने को मिल सकता है।

3. रुपया : आरबीआई ने रुपये में गिरावट को थामने के लिए कई कदम उठाए हैं। लेकिन कच्चे तेल और सोने में उछाल आया तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। डॉलर के मुकाबले इसमें और गिरावट देखने को मिल सकती है।

4. जीडीपी : पश्चिम एशिया में तनाव को देखने हुए रेटिंग एजेंसियों ने भारत की वृद्धि दर में सुस्ती का अनुमान जताया है। यह 6.5 के आसपास बनी रह सकती है, जो फिर भी दुनिया की सबसे तेज रफ्तार वाली वृद्धि रहेगी।

पहले की अपील का सीमित असर

- एलपीजी सब्सिडी छोड़ने की अपील का सीमित असर हुआ

- बिजली बचत अभियान आंशिक रूप से सफल रहे

- प्लास्टिक कम उपयोग की अपील के बावजूद खपत जारी रही

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रधानमंत्री मोदी ने किस संकट के बारे में अपील की?
प्रधानमंत्री मोदी ने कच्चे तेल के बढ़ते संकट के बारे में अपील की।
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