उद्यमिता को बढ़ावा दिए बिना समाज अपनी पूर्ण क्षमता हासिल नहीं कर सकता : मिश्रा
प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने पुणे में बैंक मैनेजमेंट के दीक्षांत समारोह में कहा कि आज का बैंकिंग क्षेत्र केवल व्यापार नहीं है, बल्कि यह समावेशन और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला है। उन्होंने वित्तीय समावेशन की ऐतिहासिक उपलब्धियों और डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे की बात की।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधान सचिव डॉ. पी.के. मिश्रा ने शनिवार को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बैंक मैनेजमेंट पुणे के 20वें वार्षिक दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि आज का बैंकिंग क्षेत्र केवल व्यापार तक सीमित नहीं रह गया है। यह समावेशन, अवसर, विश्वास और राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला बन चुका है। डॉ. मिश्रा ने कहा कि पहले बैंकिंग का उद्देश्य केवल बचत जुटाना था, लेकिन आज वित्तीय व्यवस्था को राष्ट्रीय विकास के व्यापक दृष्टिकोण से देखना होगा। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे बैंकिंग और वित्त को सामाजिक परिवर्तन के माध्यम के रूप में समझें।
डॉ. मिश्रा ने केंद्र सरकार की जैम त्रिमूर्ति (जनधन, आधार और मोबाइल) तथा डीबीटी प्रणाली को वित्तीय समावेशन की ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। कहा कि इनके जरिये अब तक 50 लाख करोड़ से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई जा चुकी है और इससे लगभग चार लाख करोड़ की बचत हुई है।उन्होंने यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को लोकतांत्रिक वित्तीय क्रांति का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह प्रणाली अब सालाना 24 हजार करोड़ से अधिक लेन-देन संभाल रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देश भारत की डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर प्रणाली का अध्ययन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमिता को बढ़ावा दिए बिना कोई भी समाज अपनी पूर्ण क्षमता हासिल नहीं कर सकता। सामाजिक सुरक्षा पर बोलते हुए उन्होंने आयुष्मान भारत और विभिन्न पेंशन योजनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वित्तीय समावेशन तभी सार्थक होगा जब वह लोगों को स्वास्थ्य, रोजगार और संकट से सुरक्षा भी प्रदान करे।
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