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स्कॉलर सुसाइड: मां का दर्द-अच्छा होता बेटी को IIT में नहीं भेजते...

Phd scholar mother

भारत में आज भी दहेज प्रथा की वजह से कितनी जिंदगियां खत्म हो रही हैं। एक और जिंदगी इस प्रथा की बलि चढ़ गई। मंगलवार शाम दिल्ली कैंपस में पीएचडी स्कॉलर की आत्महत्या की घटना ने दहेज प्रथा की पोल खोल दी। स्कॉलर मंजूला देवक के माता-पिता ने अपनी बेटी की मौत के लिए इस घिनौनी प्रथा को जिम्मेदार ठहराते हुए अपना दर्द बयां किया। बुधवार को जब वे अपनी बेटी का पार्थिव शरीर लेने एम्स पहुंचे तब मंजूला की मां सीमा ने अपने दामाद को अपनी बेटी की मौत का जिम्मेदार ठहराया। 

उन्होंने अपने दामाद पर आरोप लगाते हुए कहा कि उसने ही मंजूला के सामने ऐसे हालात पैदा कर दिए कि उसे आत्महत्या करने पर मजबूर होना पड़ा। यही नहीं, मंजूला के पिता ने बड़े ही दर्द और गुस्से में कहा, कि अच्छा होता वे अपनी बेटी को आईआईटी में न भेजते बल्कि उसकी शादी के लिए दहेज इकट्ठा कर लेते तो आज ये दिन न देखना पड़ता।  हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई जिसकी सजा हमें मिल रही है। 

आपको बता दें कि मंगलवार देर शाम 28 साल की मंजूला का शव आईआईटी दिल्ली कैंपस में उसके कमरे के पंखे से लटका हुआ मिला। पुलिस ने दरवाजा खोलकर उसे नीचे उतारा। मंजूला ने सोमवार को ही अपनी मां से आखिरी बार बात की थी। 

मंजूला की मां का कहना है कि मंजूला के पति रितेश ने 20 25 लाख रुपए दहेज की मांग की थी। हालांकि माता पिता को समझ नहीं आ रहा है कि ऐसी क्या बात हो गई कि मंजूला ने ऐसा कदम उठाया। 


साल 2013 में मंजूला की शादी हुई थी।लेकिन पिछले एक साल से दोनों अलग  रह रहे थे। मंजूला की मां ने रितेश पर आरोप लगाते हुए कहा कि वो हमेशा ही मंजूला को पढ़ाई छोड़कर उसके साथ बिजनेस में हाथ बंटाने के लिए जोर देता था। वो अपना काम शुरू करना चाहता था और मंजूला को जोर  देता था कि वो कहीं से भी 20-25 लाख रुपए लेकर आए। 

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  • Web Title:PHD scholar mother's pain - its a mistake we should to send her in iit, better to save money for dowry