एनपीएस योजना में स्वास्थ्य बीमा लेना जरूरी होगा
पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने एनपीएस स्वास्थ्य योजना के दूसरे चरण को मंजूरी दी है। इस योजना में स्वास्थ्य बीमा लेना अनिवार्य होगा। निवेशक अस्पताल में भर्ती और ओपीडी के खर्चों की भरपाई कर सकेंगे। योजना में कम से कम 25,000 रुपये का शुरुआती निवेश करना होगा।

नई दिल्ली, एजेंसी। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने अपनी खास पहल ‘एनपीएस स्वास्थ्य’ के दूसरे पायलट चरण को मंजूरी दे दी है। नए निर्देशों के अनुसार, इस योजना में स्वास्थ्य बीमा लेना अनिवार्य होगा। साथ ही नई व्यवस्था में निवेशकों के लिए नियमों को पहले से ज्यादा सुविधाजनक और लचीलापन बनाया गया है। यह योजना एनपीएस सदस्यों को अस्पताल में भर्ती होने और ओपीडी में हुए इलाज के खर्चों की भरपाई करेगी। पीएफआरडीए के नए निर्देशों के अनुसार, एनपीएस स्वास्थ्य एक स्वैच्छिक पेंशन योजना है, जिसमें भारत का कोई भी नागरिक शामिल हो सकता है। इस योजना में स्वास्थ्य बीमा लेना जरूरी कर दिया गया है।
यानी हर निवेशक को स्वास्थ्य बीमा कवर मिलेगा। बीमा की शर्तें संबंधित बीमा कंपनी और बीमा नियामक इरडा के नियमों के अनुसार होंगी। इसका प्रीमियम सीधे निवेशक के एनपीएस खाते से आंशिक निकासी के रूप में काटा जाएगा। इससे निवेशक को अलग से बीमा खरीदने की जरूरत नहीं होगी और पेंशन खाते के साथ ही स्वास्थ्य सुरक्षा मिल जाएगी। नियामक ने कहा है कि इस योजना में सभी शर्तों और बीमा से जुड़ी जानकारी पारदर्शी तरीके से ग्राहकों को दी जाएगी, ताकि उन्हें पूरी जानकारी रहे।शुरुआत में इतना निवेश जरूरीइस योजना में जुड़ने के लिए कम से कम 25,000 रुपये का शुरुआती निवेश करना होगा। इसके बाद ही सदस्य इसका फायदा लेने के योग्य बनेंगे।खाते में 50 हजार होना जरूरीएनपीएस सदस्य अपने कोष का 25 फीसदी हिस्सा कभी भी मेडिकल जरूरतों के लिए निकाल सकते हैं। खास बात यह है कि इस पर कोई प्रतीक्षा अवधि नहीं है। बस पहली बार पैसा निकालने के लिए खाते में कम से कम 50,000 रुपये होना जरूरी है।आपात स्थिति में पूरा पूरा पैसा निकाल सकेंगेइस योजना की सबसे खास बात यह है कि गंभीर बीमारी या अस्पताल में भर्ती होने की स्थिति में निवेशक को अपने पूरे एनपीएस कोष से 100 प्रतिशत राशि निकालने की अनुमति दी जाएगी। अब तक एनपीएस से आंशिक निकासी की ही सुविधा होती थी, लेकिन इस नई व्यवस्था में अगर इलाज का खर्च ज्यादा है तो पूरा पैसा एक साथ निकाला जा सकेगा।ऐसे होगा दावे का निपटाराजब भी कोष से आंशिक या पूरी रकम निकाली जाएगी तो वह सीधे संबंधित अस्पताल या बीमा कंपनी या एजेंसी को भेजी जाएगी ताकि इलाज में देरी न हो। इलाज के बाद अगर कुछ पैसा बचता है, तो वह निवेशक के खाते में वापस जमा कर दिया जाएगा।निवेश और रिटर्न का क्या होगा असरइस योजना में जमा पैसा पेंशन कोष मैनेजर ही निवेश कर सकता है। इस पर बाजार के अनुसार रिटर्न मिलता रहता है। यानी, अगर आप पैसा नहीं निकालते हैं, तो यह सेवानिवृत्ति की बचत को बढ़ाता रहेगा।
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