
एनपीएस को सोना-चांदी ईटीएफ में भी निवेश करने की अनुमति मिली
नई दिल्ली में पेंशन फंड नियामक ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली में निवेश के लिए नए विकल्पों की अनुमति दी है। सोने और चांदी के ईटीएफ को शामिल करने से पोर्टफोलियो में विविधता बढ़ेगी और स्थिरता आएगी। इसके साथ ही, निफ्टी 250 में निवेश से बड़ी कंपनियों में अवसर मिलेगा। नए नियमों से जोखिम प्रबंधन को भी प्राथमिकता दी गई है।
नई दिल्ली, एजेंसी। पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण ने राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली फंड्स को अपनी रकम अब सोने-चांदी के ईटीएफ समेत कई अन्य नई संपत्ति विकल्पों में निवेश करने की अनुमति दे दी है। यह कदम पेंशन फंड्स को पोर्टफोलियो में विविधता लाने के अधिक वैध विकल्प देने के उद्देश्य से उठाया गया है। साथ ही, नियमों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि किसी एक जोखिमभरे एसेट का हिस्सा पोर्टफोलियो में बहुत अधिक न हो। यह बदलाव सरकारी क्षेत्र और गैर-सरकारी क्षेत्र दोनों योजनाओं पर लागू होगा, जिससे सरकारी कर्मचारी, रिटेल और बड़े निवेशक इसका लाभ उठा सकेंगे।

इस फैसले के साथ ही एनपीएस और भी फायदेमंद हो गया है। पीएफआरडीए ने एनपीएस, यूपीएस और अंटल पेंशन योजना के निवेश नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए उन्हें बहुमूल्य धातुओं के ईटीएफ के अलावा निफ्टी 250 सूचकांक और वैकल्पिक निवेश कोषों में निवेश की अनुमति दी है। नए मास्टर सर्कुलर में इक्विटी, ऋण, अल्पावधि निवेश माध्यमों के लिए नई निवेश सीमा तय की गई हैं। पोर्टफोलियो होगा और स्थिर इससे पोर्टफोलियो में ऐसी संपत्तियां जुड़ेंगी, जो अस्थिर बाजार स्थितियों में स्थिरता देने के लिए जानी जाती हैं। सोना–चांदी लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माने जाते हैं और इनके शामिल होने से पेंशन कोषों की जोखिम-समायोजित रिटर्न प्रोफाइल बेहतर हो सकती है। पिछले एक साल में सोने और चांदी की कीमतों में क्रमशः 68% और 114% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही ईटीएफ निवेशकों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। सोने और चांदी के उतार-चढ़ाव को ईटीएफ आसानी से ट्रैक करते हैं। निफ्टी 250 से निवेश दायरा बढ़ा इक्विटी में निवेश की सीमा भले 25% ही रखी गई है, पर निवेश का दायरा अब और व्यापक हो गया है। निफ्टी 250 सूचकांक में निवेश की अनुमति मिलने से पेंशन फंड्स को बड़ी और मध्यम श्रेणी की कंपनियों में निवेश का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही जोखिम का संतुलन बनाए रखने के लिए शीर्ष-200 शेयरों में 90% निवेश की बाध्यता बरकरार है। इक्विटी ईटीएफ, चुनिंदा बीएसई 250 शेयरों और सीमित शर्तों के साथ आईपीओ/एफपीओ में निवेश करने की सुविधा भी जारी रहेगी। सरकारी प्रतिभूतियां निवेश का आधार बनी रहेंगी सरकारी प्रतिभूतियां अब भी एनपीएस का आधार बनी रहेंगी। पेंशन फंड पूरी स्थिरता के साथ अपने पोर्टफोलियो का 65% तक सरकारी बॉन्ड्स में रख सकेंगे। इसमें केंद्र और राज्य सरकार की सिक्योरिटीज के साथ पीएसयू के ईबीआर रूट वाले बॉन्ड्स भी शामिल हैं। यह श्रेणी लंबी अवधि की सुरक्षा और अनुमानित रिटर्न सुनिश्चित करती है। रिस्क मैनेजमेंट के लिए सख्त सीमाएं नए नियमों में जोखिम नियंत्रण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। किसी भी एक इंडस्ट्री में कुल संपत्ति का 15% से अधिक निवेश नहीं रखा जा सकेगा। प्रायोजक समूह कंपनियों में इक्विटी में 5% और गैर-प्रायोजक कंपनियों में 10% की सीमा तय की गई है। ऋण में निवेश के लिए भी इसी तरह नेट वर्थ आधारित सीमाएं तय की गई हैं। इनविट्स और रीट्स में कुल निवेश 3% से अधिक नहीं होगा, जबकि किसी एक इश्यू पर 5% और ऋण इश्यू पर 15% की सीमा लागू की गई है। नया ढांचा देगा ज्यादा रिटर्न का रास्ता नए निवेश विकल्प जोड़ने के बाद एनपीएस, यूपीएस और अटल पेंशन योजना का निवेश ढांचा पहले से कहीं ज्यादा विविधता वाला हो गया है। लंबे समय में जोखिम कम करने और रिटर्न क्षमता बढ़ाने के लिहाज से ये बदलाव निवेशकों के लिए फायदेमंद माने जा रहे हैं। पेशंन नियामक का यह कदम पेंशन निवेशों को आधुनिक बाजार ढांचे के अनुरूप ढालने की दिशा में बड़ा सुधार है.

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