धनशोधन मामले में बिलकिस शाह के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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पटियाला हाउस कोर्ट ने धनशोधन मामले में बिलकिस शाह के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर उनकी भूमिका में गंभीर संदेह है। ईडी के अनुसार, 2004-2005 के बीच 2.08 करोड़ रुपये का लेनदेन अवैध था, जिसे विभिन्न संपत्तियों की खरीद और निजी खर्चों के लिए इस्तेमाल किया गया।

धनशोधन मामले में बिलकिस शाह के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश

पटियाला हाउस कोर्ट ने धनशोधन मामले में शब्बीर अहमद शाह की पत्नी बिलकिस शाह के खिलाफ प्रथम दृष्टया गंभीर संदेह पाते हुए आरोप तय करने का आदेश दिया है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद सामग्री उनके मामले में आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार बनाती है। यह आदेश अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश शेफाली बरनाला टंडन की अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की ओर से दायर मामले में दिया है। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर बिलकिस शाह की भूमिका को लेकर प्रथम दृष्टया गंभीर संदेह बनता है, इसलिए उनके खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धाराओं के तहत आरोप तय किए जाएं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर दोष सिद्ध करना जरूरी नहीं होता, बल्कि यह देखना होता है कि क्या मामले में आगे सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है। ईडी की ओर से विशेष लोक अभियोजक नवीन कुमार मट्टा ने दलील दी कि जांच के दौरान जुटाए गए सबूत आरोपी की भूमिका को स्पष्ट करते हैं। एजेंसी के अनुसार, सह-आरोपी मोहम्मद असलम वानी हवाला के जरिए पैसे पहुंचाने का काम करता था। वह दिल्ली में रकम प्राप्त करता और उसे शबीर अहमद शाह तथा कई बार बिलकिस तक पहुंचाता था। ईडी का आरोप है कि वर्ष 2004 से 2005 के बीच कुल 2.08 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ, जिसे अपराध से अर्जित आय माना गया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस धन का इस्तेमाल निजी खर्चों, अचल संपत्तियों की खरीद और आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक जीवनशैली बनाए रखने में किया गया। अभियोजन पक्ष ने यह भी कहा कि श्रीनगर में कुछ संपत्तियां बेनामी तरीके से खरीदी गईं, ताकि अवैध धन के स्रोत को छिपाया जा सके। अदालत ने इस पहलू को भी महत्वपूर्ण माना। अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि बिलकिस एक सरकारी डॉक्टर हैं और उनकी आय सीमित है, लेकिन वे वित्तीय लेनदेन, संपत्ति खरीद और कर्ज चुकाने के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सकीं। इससे धन के स्रोत को लेकर संदेह और मजबूत होता है। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजी साक्ष्य और पीएमएलए की धारा 50 के तहत दर्ज बयानों से यह स्पष्ट होता है कि मामले में आगे कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार मौजूद है।

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