देश में मेडिकल सीटों की असमानता पर संसदीय समिति ने चिंता जताई
-समिति ने कहा, कई राज्यों में सीटें राष्ट्रीय औसत से कम हैं -10 लाख की

नई दिल्ली, एजेंसी। देश में मेडिकल शिक्षा की उपलब्धता और फीस को लेकर संसदीय समिति ने गंभीर चिंता जताई है। समिति ने कहा है कि देश में एमबीबीएस सीटों का वितरण बेहद असमान है। कुछ राज्यों में सीटें पर्याप्त हैं, जबकि कई राज्यों में राष्ट्रीय औसत (75 एमबीबीएस सीटें प्रति दस लाख आबादी) के मुकाबले बेहद कम हैं। समिति की रिपोर्ट के अनुसार, कर्नाटक, तेलंगाना और तमिलनाडु में करीब 150 सीटें प्रति दस लाख की आबादी में हैं। लेकिन पुडुचेरी में यह संख्या आश्चर्यजनक रूप से 2,000 के आसपास है। वहीं, दूसरी तरफ बिहार में केवल 21 सीटें प्रति दस लाख की आबादी के बीच उपलब्ध हैं, जबकि कई राज्यों में यह संख्या 50 से भी कम है।
समिति ने सरकार से कहा कि ऐसे राज्यों में 100 से कम सीटें प्रति 10 लाख की आबादी होने पर नए मेडिकल कॉलेज खोलने की स्पष्ट गाइडलाइन तैयार की जाए। राष्ट्रीय परीक्षा लागू करने की सिफारिश समिति ने जोर दिया कि राष्ट्रीय परीक्षा लागू होने से मेडिकल शिक्षा में एकरूपता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित होगी। नीति आयोग की कमेटी को जल्द रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। एम्स जैसे संस्थानों को मेंटोर बनाने का सुझाव रिपोर्ट में कहा गया है कि देश को अलग-अलग जोन में बांटकर प्रत्येक जोन में एम्स जैसे बड़े संस्थानों को मेंटोर कॉलेज बनाया जाए,।ताकि नए और निजी मेडिकल कॉलेजों की शिक्षा गुणवत्ता में सुधार हो सके। समिति के सुझाव...... -निजी मेडिकल कॉलेजों में 50 प्रतिशत सीटों पर राज्य सरकार की फीस लागू की जाए -50 प्रतिशत सीटों की फीस राज्य की शुल्क नियामक समिति तय करे -फैकल्टी की कमी और घोस्ट फैकल्टी(गैर हाजिर शिक्षक) पर सख्ती की जरूरत -दूरदराज के मेडिकल कॉलेजों में शिक्षकों की कमी को दूर किया जाए -वेतन, नौकरी की सुरक्षा और करियर ग्रोथ जैसे प्रोत्साहन दिए जाएं

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




