बैंकों के धन की लूट का माध्यम बन गया है दिवाला कानून : विपक्ष

Newswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली में लोकसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक 2025 पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार पर आरोप लगाया कि यह विधेयक कंपनियों और बैंकों के धन की लूट का साधन बन गया है। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं, जबकि किसानों का कर्ज माफ नहीं किया जा रहा है।

बैंकों के धन की लूट का माध्यम बन गया है दिवाला कानून : विपक्ष

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। लोकसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशेाधन) विधेयक 2025 पर चर्चा में विपक्षी सदस्यों ने कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता कानून कंपनियों और बैंक के धन के लूट का माध्यम बन गया है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि सरकार ने 52 बड़े-बड़े उद्योगपतियों के कर्ज माफ किए हैं, लेकिन किसानों का मुट्ठी भर कर्ज माफ नहीं किया है। भाजपा के अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा कि मोदी सरकार में सरकारी बैंक मुनाफे में आए, वित्तीय घाटा घटा और निवेश बढ़ा है। लोकसभा में बुधवार को दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशेाधन) विधेयक 2025 पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस की धनोरकर प्रतिभा सुरेश ने कहा कि कंपनियों को क्षमता से ज्यादा कर्ज देने से वे दिवालिया हो जाती हैं तथा बाद में औने-पौने दामों में दूसरी कंपनियों के मालिक उन्हें खरीद लेते हैं, जिससे बैंकों की राशि डूब जाती है।

इस पूरे खेल में राजनीतिक लोग भी शामिल होते हैं। उन्होंने कहा कि बैंकों में अपनी बचत का पैसा जमा करने वाले किसान, मजदूर और महिलाओं का पैसा बड़े लोगों की जेब में चला जाता है। सुरेश ने कहा कि बैंकों का पैसा लेकर कई बड़े-बड़े उद्योगपति विदेश चले गए, उन्हें वापस नहीं लाया जा सका है। किसान और छोटे व्यापारी यदि कर्ज चुकाने में कुछ भी देरी करते हैं, तो बैंक उनकी संपत्तियां कुर्क कर लेते हैं और उन्हें अपमानित करते हैं।भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता विधेयक आने से पहले घाटे में जाने वाली कंपनियों को फिर से खड़ा करने में बहुत जटिलताएं थीं और कई-कई वर्ष लग जाते थे। लेकिन, इस विधेयक के आने के बाद बड़ी संख्या में घाटे में चली गईं कंपनियों का पुनरुद्धार हुआ है। ठाकुर ने कहा कि नरेंद्र मोदी सरकार आने के बाद से बैंकों की गैर निष्पादित संपत्तियां 12 प्रतिशत से अधिक थीं, जो अब घटकर 2.3 प्रतिशत रह गई हैं। स्व सहायता समूह सुदृढ़ किए गए हैं और महिलाओं को कर्ज देने का प्रतिशत बहुत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की सुधार एक्सप्रेस तेजी से चल रही है और आगामी दिनों में इसकी गति बढ़ाई जाएगी।समाजवादी पार्टी के वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक छोटे व्यापारियों और बड़ी कंपनियों के बीच विभेद पैदा करता है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक आने के बाद से बैंकों की बहुत बड़ी राशि हड़प कर ली गई है। उन्होंने कहा कि वीडियोकॉन, भूषण स्टील और कई अन्य बड़ी कपंनियों द्वारा बैंकों से लिया गया हजारों करोड़ रुपया इस कानून के माध्यम से डूब गया और कंपनियां दूसरों के नाम हो गईं। सिंह ने कहा कि बड़ी-बड़ी कपंनियों का हजारों करोड़ रुपया ‘राइट ऑफ’ के नाम पर माफ कर दिया गया, लेकिन किसानों का कर्ज माफ करने में सरकार हमेशा बहाने बनाती रही।

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