छोटे कॉलेजों के छात्रों को बड़ी कंपनियां दे रहीं मौका
जोहो, एप्पल और एनवीडिया जैसी प्रमुख टेक कंपनियों में काम करने वाले एक तिहाई भारतीय कर्मचारी टियर-3 कॉलेजों से स्नातक हैं। एक सर्वे के अनुसार, कंपनियाँ अब कौशल पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। टियर 3...

- जोहो, एप्पल और एनवीडिया में काम करने वाले एक तिहाई भारतीय कर्मचारी टियर-3 संस्थानों से नई दिल्ली, एजेंसी। विश्व की बड़ी कंपनियों में नौकरी पाने के लिए जरूरी नहीं है कि डिग्री या डिप्लोमा किसी बड़े संस्थान से ही लिया हो। प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनियों जैसे जोहो, एप्पल और एनवीडिया में काम करने वाले एक तिहाई से अधिक भारतीय कर्मचारी देश के टियर 3 कॉलेजों (छोटे संस्थानों)से स्नातक हैं। एक एनोनिमस सोशल मीडिया ऐप ब्लाइंड की 1,602 भारतीय पेशेवरों पर किए गए सर्वे पर आधारित रिपोर्ट में कहा गया है कि ज्यादातर बड़ी कंपनियां अब कौशल पर ध्यान दे रही हैं और उसी को आधार मानकर कर्मचारियों का चयन कर रही हैं।
इस सर्वे में एनआईआरएफ 2025 रैंकिंग के आधार पर कॉलेजों को टियर 1, टियर 2, टियर 3 और विदेशी संस्थानों में वर्गीकृत किया गया है। सर्वे में शामिल 41 प्रतिशत पेशेवरों ने टियर 1 कॉलेजों जैसे आईआईटी, आईआईएससी, टॉप आईआईएम, बिट्स पिलानी आदि से ग्रेजुएशन किया है। वहीं 30 प्रतिशत पेशेवरों ने टियर 2 कॉलेजों से, 25 प्रतिशत ने टियर 3 और चार प्रतिशत पेशेवरों ने विदेशी संस्थानों से स्नातक की डिग्री ली है। कौशल को प्राथमिकता रिपोर्ट में कहा गया कि अब टेक कंपनियां कर्मचारियों का चुनाव करते समय कौशल पर फोकस करती हैं। जोहो, एप्पल और एनवीडिया, सैप और पेपाल जैसी कंपनियों ने कहा है कि कॉलेज का नाम कर्मचारियों के करियर पर ज्यादा असर नहीं डालता। वहीं गोल्डमैन सैक्स, वीजा , एटलसियन , ओरेकल और गूगल जैसी कंपनियां अभी भी कैंपस हायरिंग पर भरोसा रखती हैं। कर्मचारियों का नजरिया सर्वे में बड़ी कंपनियों में काम कर रहे कर्मचारियों ने अपने अनुभव साझा किए। 59 प्रतिशत टियर 3 एलुमनाई और 45 प्रतिशत विदेशी स्नातक अपनी कॉलेज की पढ़ाई को अपने रिज्यूमे पर केवल एक पंक्ति भर मानते थे। वहीं टियर 1 और टियर 2 के अधिकांश एलुमनाई ने अपने करियर के विकास का श्रेय कैंपस भर्ती को दिया। टियर 3 के लगभग 15 प्रतिशत एलुमनाई ने कहा कि उनकी एजुकेशन का महत्वपूर्ण प्रभाव उनके वेतन पर पड़ा, जबकि 74 प्रतिशत ने कहा कि इसका प्रभाव शुरूआती चरण में ही रहा। बाद में कौशल के आधार पर प्रमोशन और वेतन वृद्धि हुई। लगभग 53 प्रतिशत विदेशी स्नातकों ने कहा कि बड़े कॉलेज से पढ़ने के कारण उनके वेतन में कोई बहुत बड़ी बढ़ी बढ़ोतरी नहीं हुई।

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