दूषित पेयजल मामले की जांच एनजीटी की छह सदस्यीय पैनल करेगी
- इंदौर हाईकोर्ट में स्थिति रिपोर्ट पेश की गई - एनजीटी द्वारा गठित पैनल छह

भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में दूषित पेयजल आपूर्ति को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने कड़ा रुख अपनाया। एनजीटी ने मामले की जांख् के लिए छह सदस्यों का एक पैनल गठित किया है जो छह हफ्तों में अपनी रिपोर्ट देगी। इसमें आईआटी इंदौर के विशेषज्ञ, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, राज्य के पर्यावरण विभाग, नगरीय प्रशासन, जल संसाधन विभाग और एमपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के प्रतिनिधि शामिल हैं। भोपाल स्थित एनजीटी की पीठ ने साफ शब्दों में कहा कि दूषित पानी की आपूर्ति करना मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। रिपोर्ट में मौतों का जिक्र, बीमारी का नहीं मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में राज्य सरकार ने गुरुवार को स्थिति रिपोर्ट पेश करते हुए शहर के भागीरथपुरा इलाके में उल्टी-दस्त प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत सात लोगों की मौत का जिक्र किया है।
हालांकि, 158 पन्नों की इस रिपोर्ट में स्पष्ट खुलासा नहीं किया गया है कि इन लोगों की मौत किस बीमारी के कारण हुई। उच्च न्यायालय भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई कर रही है। अगली सुनवाई के लिए 20 जनवरी की तारीख तय की गई है और राज्य के मुख्य सचिव को निर्देश दिया कि वह इस तारीख को भी ऑनलाइन माध्यम से अदालत के सामने हाजिर रहें। एनजीटी के निर्देश एनजीटी ने साफ पानी सुनिश्चित करने के लिए कई निर्देश दिए हैं। इसके तहत पानी की गुणवत्ता बताने के लिए मोबाइल ऐप, सीवेज लाइनों की जीआईएस मैपिंग, टंकियों की नियमित सफाई आदि। इसके अलावा मार्च से जुलाई के बीच पानी की कमी को देखते हुए निर्माण कार्य रोकने और वार्डवार पानी देने की बात कही गई है। सरकारी और निजी इमारतों में वर्षा जल संचयन अनिवार्य करने, नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई, डेयरियों को शहर से बाहर शिफ्ट करने और पीने के पानी के स्रोतों में मूर्ति विसर्जन पर पूरी तरह रोक लगाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 30 मार्च को होगी।

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