मसूरी पर्यावरण मामले में उत्तराखंड को नोटिस
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने उत्तराखंड सरकार को मसूरी के इकोलॉजिकली सेंसिटिव इलाके में पर्यावरण सुरक्षा के दिशा-निर्देशों का पालन नहीं करने पर नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने उत्तराखंड के चीफ सेक्रेटरी से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।

सरकार ने मसूरी के इकोलॉजिकली सेंसिटिव इलाके पर नहीं लिया संज्ञान एनजीटी ने निर्देशों के संबंध में कोई कार्रवाई नहीं होने पर जताई नाराजगीनई दिल्ली, एजेंसी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने मसूरी के नाजुक पर्यावरण को खराब होने से बचाने हेतु निर्देशों का पालन नहीं करने पर उत्तराखंड सरकार को नोटिस जारी किया है। एनजीटी ने उत्तराखंड के चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को होगी।एनजीटी ने पिछले साल मई में एक मामले का निपटारा करने के बाद यह ऑर्डर जारी किया था, जिसमें उसने एक मीडिया रिपोर्ट के मद्देनजर खुद से कार्रवाई शुरू की थी।
रिपोर्ट में कहा गया था कि 2023 की जोशीमठ आपदा मसूरी के लिए एक चेतावनी थी, जहां बिना प्लान के कंस्ट्रक्शन जारी थे।ट्रिब्यूनल के आदेश में कहा गया था, हम इस मामले को इस निर्देश के साथ निपटाते हैं कि उत्तराखंड राज्य 19 एक्शन पॉइंट (रोकथाम के उपाय करने के लिए) के साथ-साथ सभी दूसरे सुधार के उपाय भी लागू करेगा, जो ठोस साइंटिफिक सिद्धांतों और तरीकों पर आधारित होंगे। ताकि, यह पक्का हो सके कि नाजुक हिमालयी क्षेत्र के पर्यावरण को उसकी वहन क्षमता से ज्यादा नुकसान न हो। ट्रिब्यूनल ने छह महीने बाद एक्शन टेकन रिपोर्ट मांगी थी।इस साल 24 मार्च को एनजीटी ने कहा कि ट्रिब्यूनल के निर्देशों का पालन करते हुए राज्य के एडिशनल सेक्रेटरी ने एक रिपोर्ट फाइल की थी। एनजीटी चेयरपर्सन जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और एक्सपर्ट मेंबर ए सेंथिल वेल और अफरोज अहमद की बेंच ने कहा, “रिपोर्ट देखने पर हमें पता चला कि ट्रिब्यूनल के ऑर्डर में बताए गए जरूरी मुद्दों पर कोई खास एक्शन नहीं लिया गया है। हालांकि, रिपोर्ट उत्तराखंड सरकार ने फाइल की है, लेकिन सरकार की तरफ से कोई मौजूद नहीं है।” इस पर एनजीटी ने राज्य के चीफ सेक्रेटरी को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई को तय की।ये उपाय करने हैं :19 बचाव और सुधार के उपायों में टनलिंग और बड़े सिविल स्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स, प्लानर्स और एडमिनिस्ट्रेटर्स के लिए जीआईएस-बेस्ड डिसीजन सपोर्ट सिस्टम बनाना, मौजूदा बिल्डिंग्स की जांच, अच्छे ड्रेनेज का इंतजाम, खराब ढलानों पर मिट्टी को स्थिर करने के उपाय, स्प्रिंग-शेड को नया बनाना, नई बिल्डिंग्स के कंस्ट्रक्शन पर रोक लगाना और सही वेस्ट मैनेजमेंट शामिल हैं। इसमें बायो-डिग्रेडेबल मटीरियल के इस्तेमाल को बढ़ावा देने, पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम में स्थानीय लोगों को शामिल करने, इलाके की क्षमता के हिसाब से पर्यटकों का पंजीकरण करने, ट्रैफिक को आसान बनाने और मसूरी के लिए नए मास्टर प्लान में सुधार के उपायों को शामिल करने के उपाय भी शामिल हैं।
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