
टैक्स लगाने से ज्यादातर अमीर छोड़ देते हैं शहर
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी अरबपतियों पर अधिक टैक्स लगाने की योजना बना रहे हैं। यह कदम चुनावी वादों को पूरा करने के लिए धन जुटाने के उद्देश्य से है। लंदन में भी इसी तरह की टैक्स नीतियों पर बहस हो रही है, जबकि दुबई में अमीर लोगों की निजी कमाई पर कोई टैक्स नहीं है।
न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी शहर के अरबपति लोगों पर और टैक्स लगाने की योजना बना रहे हैं। ऐस वह अपने चुनावी वादों को पूरा करने के लिए धन जुटाने के इरादे से कर रहे हैं। न्यूयॉर्क ही ऐसा वैश्विक महानगर नहीं है जहां टैक्स और अरबपति लोगों को लेकर बहस चल रही है। लेबर सरकार की टैक्स नीतियों ने लंदन में भी इसी तरह की बहस को जन्म दिया। कुछ शहरों में अत्यंत अमीर लोगों की संख्या ज्यादा होती है, तो अधिक टैक्स से कुछ अमीर लोग उस शहर को भी छोड़ देते हैं। हालांकि यूएई के दुबई शहर में अमीर व्यक्तियों की निजी कमाई पर कोई टैक्स नहीं है।
इसलिए यह शहर अमीरों की पहली पसंद बनता जा रहा है। श्रीदेव कृष्णकुमार की रिपोर्ट : लंदन में न्यूयॉर्क की तुलना में कम अमीर व्यक्ति न्यूयॉर्क में सिर्फ अरबपति ही नहीं, बल्कि बहुत बड़ी संख्या में करोड़पति परिवार भी रहते हैं। इसलिए यहां अमीरी फैली हुई और मजबूत है। यह सिर्फ कुछ लोगों तक सीमित नहीं है। सैन फ्रांसिस्को बे एरिया में बहुत ज्यादा अमीर रहते हैं, लेकिन वह कुछ ही लोगों के पास सिमटी है। इसकी वजह टेक कंपनियों से बनी दौलत है। वहीं, लंदन में अमीर लोगों की संख्या ज्यादा है, लेकिन न्यूयॉर्क की तुलना में अरबपति कम हैं। बहुत ज्यादा कमाने वाले लोग भी कम हैं। मुंबई और दिल्ली में संख्या कम भारत के मुंबई और दिल्ली शहरों में अमीर लोगों की कुल संख्या कम है, लेकिन अरबपतियों की हिस्सेदारी ज्यादा है। इसका मतलब यह है कि भारत में दौलत थोड़े लोगों के हाथ में ज्यादा केंद्रित है। एशिया के शहर सिंगापुर, बीजिंग और शंघाई में अमीर लोग भी बड़ी संख्या में हैं। ब्रिटेन को छोड़कर जा रहे हैं अमीर टैक्स पर इतनी बहस क्यों हो रही है। अमीर लोग अब देश बदलकर रहने लगे हैं। इसी वजह से सरकारों में टैक्स को लेकर बहस तेज हो गई है। यूएई में व्यक्तिगत आय पर कोई टैक्स नहीं है। इसी वजह से 2025 में 9,800 करोड़पति वहां जाकर रहने लगे। लेकिन सिर्फ टैक्स ही वजह नहीं है। बड़ी अर्थव्यवस्था, व्यापार और बड़ी नौकरी के चलते अमेरिका में टैक्स ज्यादा होने के बावजूद अमीर लोग आते रहते हैं। वहीं, यूरोप की स्थिति थोड़ी अलग है। इटली, पुर्तगाल और ग्रीस टैक्स ज्यादा होने के बाद भी अमीरों को खींच रहे हैं। वे नए लोगों के लिए खास टैक्स छूट और निवेश करने वालों के लिए योजनाएं लेकर आते हैं। ब्रिटेन में उलटा हो रहा है। ब्रिटेन से 2025 में सबसे ज्यादा करोड़पति चले गए। इसके पीछे इनकम टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स और विरासत टैक्स ज्यादा पाया गया। अमीरों को मिलने वाली पुरानी टैक्स छूट भी खत्म कर दी गई। फ्रांस और जर्मनी से भी कुछ अमीर लोग बाहर जा रहे हैं। क्योंकि टैक्स और बिजनेस माहौल को कम प्रतिस्पर्धी माना जा रहा है। सरकारों को ज्यादा नुकसान नहीं टैक्स बढ़ने पर कुछ अमीर लोग जरूर प्रतिक्रिया करते हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम होती है। हालांकि सरकार की कमाई पर ज्यादा नुकसान नहीं पड़ता। कुछ बहुत अमीर लोग देश या राज्य छोड़ सकते हैं, लेकिन ये संख्या हजारों में से कुछ सैकड़ों ही होती है। कैलिफोर्निया में 2012 में 10 लाख अमेरिकी डॉलर से ज्यादा कमाने वालों पर टैक्स बढ़ाया गया। कुल करोड़पति परिवार लगभग 67,000 थे और सिर्फ 535 छोड़कर गए। डेनमार्क की स्टडी में पाया गया कि असर ज्यादातर सबसे अमीर लोगों पर पड़ता है जबकि आम अमीर लोगों पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ता।

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