शोधः आईआईटी बॉम्बे ने गुरुत्वाकर्षण की 'क्वांटम प्रकृति' जांचने की नई विधि सुझाई
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने गुरुत्वाकर्षण की क्वांटम प्रकृति की जांच के लिए 'डायनेमिकल फिडेलिटी ससेप्टिबिलिटी (डीएफएस)' नामक नई तकनीक विकसित की है। यह विधि सूक्ष्म स्तर पर गुरुत्वाकर्षण के क्वांटम संकेतों को पकड़ने में सक्षम है, भले ही एंटैंगलमेंट बहुत कमजोर हो। यह भविष्य के क्वांटम गुरुत्वाकर्षण प्रयोगों के लिए नई दिशा प्रदान कर सकती है।

- नई तकनीक से क्वांटम प्रभावों के संकेत, भविष्य के प्रयोगों के लिए नई दिशा मिलने की उम्मीद मुंबई, एजेंसी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने गुरुत्वाकर्षण की क्वांटम प्रकृति की जांच के लिए एक नई विधि प्रस्तावित की है। ‘डायनेमिकल फिडेलिटी ससेप्टिबिलिटी (डीएफएस)’ नामक यह तकनीक सूक्ष्म स्तर पर गुरुत्वाकर्षण के क्वांटम व्यवहार के संकेत पकड़ने में अधिक संवेदनशील मानी जा रही है। शोधकर्ताओं के अनुसार, अब तक गुरुत्वाकर्षण की क्वांटम प्रकृति को समझने के लिए मुख्य रूप से क्वांटम एंटैंगलमेंट पर आधारित परीक्षणों का सहारा लिया जाता रहा है, लेकिन ये परीक्षण हमेशा पर्याप्त नहीं हो सकते।क्वांटम
एंटैंगलमेंट वह प्रक्रिया है, जिसमें दो कण-जैसे फोटॉन या इलेक्ट्रॉन-इस प्रकार जुड़ जाते हैं कि उनकी अवस्थाएं परस्पर निर्भर हो जाती हैं और वे एक ही क्वांटम अवस्था साझा करते हैं। शोध से जुड़े वैज्ञानिक पी जॉर्ज क्रिस्टोफर और प्रोफेसर एस. शंकरनारायणन का कहना है कि यदि किसी प्रयोग में एंटैंगलमेंट स्पष्ट रूप से न दिखाई दे, तब भी यह जरूरी नहीं कि गुरुत्वाकर्षण क्वांटम न हो। इसकी क्वांटम प्रकृति अन्य तरीकों से भी सामने आ सकती है। संभव है कि प्रभाव बहुत कमजोर या धीमा हो। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने डीएफएस तकनीक प्रस्तावित की है। इसमें यह देखा जाता है कि सूक्ष्म स्तर पर छोटे-छोटे बदलावों के प्रति किसी क्वांटम प्रणाली की अवस्था समय के साथ कैसे बदलती है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह विधि तब भी गुरुत्वाकर्षण के क्वांटम संकेत पकड़ सकती है, जब एंटैंगलमेंट बहुत कमजोर या लगभग न के बराबर हो। प्रोफेसर शंकरनारायणन के अनुसार, इस अध्ययन से भविष्य में क्वांटम गुरुत्वाकर्षण से जुड़े प्रयोगों के लिए एक नई दिशा मिल सकती है और यह इस क्षेत्र में आगे के शोध के लिए मार्गदर्शक साबित हो सकता है।- दो सिद्धांतों के बीच उलझनभौतिकी लंबे समय से दो अलग-अलग लेकिन सफल सिद्धांतों पर आधारित रही है। अल्बर्ट आइंस्टीन का सामान्य सापेक्षता सिद्धांत ग्रहों, तारों और आकाशगंगाओं जैसी विशाल वस्तुओं की गति और गुरुत्वाकर्षण को समझाता है। इसमें गुरुत्वाकर्षण को किसी बल के रूप में नहीं, बल्कि स्पेस-टाइम के वक्रण (कर्वेचर) के रूप में बताया गया है। इसके विपरीत, क्वांटम भौतिकी परमाणु और उप-परमाणु स्तर पर कणों के व्यवहार की व्याख्या करती है, जहां कण एक साथ कई अवस्थाओं में मौजूद हो सकते हैं। समस्या तब पैदा होती है, जब दोनों सिद्धांतों को एक साथ लागू करना पड़ता है- जैसे ब्लैक होल जैसी अत्यधिक परिस्थितियों में। ऐसी परिस्थितियों में कुछ वैज्ञानिक गुरुत्वाकर्षण को 'ग्रैविटॉन' नामक काल्पनिक कणों द्वारा वहन किए जाने वाले बल के रूप में भी समझने की कोशिश करते हैं।
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