पुराने पीठ दर्द से बदल रहा सोचने-सुनने का तरीका

Mar 05, 2026 03:04 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कोलोराडो विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने अध्ययन किया है कि पुराना पीठ दर्द केवल शारीरिक समस्या नहीं है, बल्कि यह मस्तिष्क की प्रक्रिया से जुड़ा है। 'पेन रिप्रोसेसिंग थेरेपी' का उपयोग करके मरीजों को समझाया जाता है कि दर्द का सिग्नल गलत है। यह अध्ययन 60 करोड़ लोगों के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है।

पुराने पीठ दर्द से बदल रहा सोचने-सुनने का तरीका

कोलोराडो विश्वविद्यालय के स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने किया अध्ययन इस समस्या से निपटने के लिए ‘पेन रिप्रोसेसिंग थेरेपी’ के उपयोग पर जोर जब पीठ दर्द पुराना हो जाता है, तो शरीर के ऊतक ठीक होने के बावजूद दर्द के सिग्नल भेजता रहता है कोलोराडो, एजेंसी। पुराना पीठ दर्द आपके सोचने और सुनने का तरीका बदल रहा है। हाल ही में इस संबंध में अमेरिका के कोलोराडो विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने जर्मनी के हैम्बर्ग-एप्पेंडॉर्फ विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के साथ एक अध्ययन किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि पुराना पीठ दर्द का संबंध केवल आपकी हड्डियों या मांसपेशियों से नहीं है, बल्कि यह आपके दिमाग के काम करने के तरीके को बदल देता है।

दुनिया भर में करीब 60 करोड़ लोग इस समस्या से जूझ रहे हैं, और यह अध्ययन उनके लिए उम्मीद की किरण लेकर आई है। दिमाग का वॉल्यूम बटन : विशेषज्ञों ने 193 लोगों पर एक प्रयोग किया। उन्होंने पाया कि जिन्हें पीठ दर्द था, उन्हें आम शोर-शराबा भी असहनीय लग रहा था। जब उनके दिमाग का एमआरआई स्कैन किया गया, तो असल वजह सामने आई। आमतौर पर, दिमाग फालतू आवाजों को फिल्टर कर देता है, लेकिन पीठ दर्द के मरीजों में दिमाग के ऑडिटरी कॉर्टेक्स (साउंड प्रोसेस करने वाला हिस्सा) और इंसुला (भावनाओं और संवेदनाओं को जोड़ने वाला हिस्सा) जरूरत से ज्यादा सक्रिय पाए गए। इसका मतलब है कि उनके दिमाग का ‘वॉल्यूम बटन’ हर बाहरी सिग्नल के लिए बहुत बढ़ गया है। वहीं, दिमाग के वे हिस्से, जो भावनाओं को शांत रखते हैं, वे कमजोर पड़ गए थे। दर्द की नई परिभाषा : पीठ दर्द के मरीजों के दिमाग का पैटर्न वैसा ही दिखा जैसा फाइब्रोमायल्जिया के मरीजों में होता है, इस बीमारी में पूरे शरीर में दर्द और संवेदनशीलता रहती है। इससे यह साफ हुआ कि जब दर्द पुराना हो जाता है, तो शरीर के ऊतक ठीक होने के बावजूद दर्द के सिग्नल भेजता रहता है। यानी चोट ठीक हो चुकी है, लेकिन दिमाग का अलार्म अब भी बज रहा है। इलाज का नया तरीका : इस समस्या से निपटने के लिए विशेषज्ञों ने पेन रिप्रोसेसिंग थेरेपी का इस्तेमाल किया। इस मनोवैज्ञानिक तरीके में मरीजों को यह समझाया जाता है कि पीठ में कोई खतरा नहीं है, बल्कि उनका दिमाग गलत सिग्नल दे रहा है। बॉक्स - क्या कहते हैं विशेषज्ञ विशेषज्ञों के मुताबिक, अक्सर पुराने पीठ दर्द वाले मरीजों को कहा जाता है कि उनकी रिपोर्ट सामान्य है और उन्हें कोई समस्या नहीं है। यह अध्ययन बताता है कि समस्या असली है, लेकिन यह पीठ में नहीं, बल्कि दिमाग में है। दिमाग के सर्किट को सही तरीके से प्रशिक्षित करके इस पुराने दर्द और आवाज या संवेदनशीलता की ज्यादा प्रतिक्रिया से राहत पाई जा सकती है। इससे मरीज रोजमर्रा के काम और जीवन को संभाल सकते हैं। इसका मतलब यह है कि क्रोनिक दर्द केवल शरीर की चोट नहीं, बल्कि दिमाग की प्रक्रिया का भी नतीजा हो सकता है।

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