
दिल के खतरे से आगाह करेगी आंखें : अध्ययन
संक्षेप: - कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने खोजा तरीका - आंखों की छोटी रक्त
- व्यक्ति की जैविक उम्र बढ़ने के बारे में भी मिलेगी जानकारी - 74 हजार से अधिक लोगों के डाटा का इस्तेमाल किया गया - रैटिना स्कैन, आनुवंशिकी डाटा और खून के नमूनों का किया विश्लेषण वैंकूवर, एजेंसी। आमतौर पर आंखें सिर्फ देखने का काम नहीं करतीं, बल्कि सेहत और उम्र के बारे में भी बहुत कुछ बताती हैं। कनाडा के वैज्ञानिकों ने एक नई एक ऐसा तरीका खोजा है, जिसमें आंखों को स्कैन करके पता लगा सकते हैं कि किसी व्यक्ति को दिल की बीमारी होने का कितना खतरा है और वह कितनी तेजी से बूढ़ा हो रहा है। शोध में कहा गया कि आंखों की छोटी रक्त वाहिकाओं की स्कैनिंग से यह जाना जा सकता है।

अध्ययन कनाडा की मैकमास्टर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने किया है। साइंसेज एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि आंखों की रेटिना शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं के बारे में जानकारी देती है। यानी आंखों के अंदर की रक्त नलिकाओं की स्थिति पूरे शरीर की नसों के स्वास्थ्य को बता सकती है। मैकमास्टर विश्वविद्यालय और हैमिल्टन हेल्थ साइंसेज के शोधकर्ताओं के अनुसार, यह जांच बिना किसी दर्द या जटिल प्रक्रिया के हो सकती है। इससे भविष्य में स्वास्थ्य जांच का एक सामान्य और सुविधाजनक तरीका बन सकता है। तीन स्थितियों का किया विश्लेषण इस शोध में 74 हजार से अधिक लोगों के डाटा का इस्तेमाल किया गया। शोधककर्ताओं ने रेटिनल स्कैन, जीन संबंधी जानकारी और खून के नमूनों का विश्लेषण किया, ताकि यह समझा जा सके कि किन लोगों में रक्त वाहिकाओं की संरचना में अंतर है और उसका स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है। परिणामों से पता चला कि जिन लोगों की आंखों की रक्त वाहिकाएं कम शाखाओं वाली और अधिक सीधी थीं, उनमें दिल का रोग होने का खतरा अधिक था। साथ ही उनके शरीर में जैविक उम्र बढ़ने के संकेत भी मिले। उनमें वृद्धावस्था के लक्षण, अधिक सूजन और कम जीवनकाल का पता चला। उम्र बढ़ाने के दो प्रोटीन का भी पता लगा अध्ययन में परिणाम आनुवंशिकी डाटा और खून के नमूनों की समीक्षा से मिला। इसके जरिये शोधकर्ताओं ने न सिर्फ आंखों की रक्त वाहिकाओं में होने वाले बदलावों के संबंध में पता लगाया, बल्कि संभावित जैविक कारणों की भी जानकारी मिली। इससे उन्हें उन विशिष्ट प्रोटीनों की पहचान करने में मदद मिली, जो उम्र बढ़ने और बीमारियों का कारण बन सकते हैं। ये दो प्रोटीन एमएमपी12 और आईजीजी-एफसी रिसेप्टर IIबी हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार, ये दोनों ही सूजन और तेजी से उम्र बढ़ने से जुड़े हैं। शोधकर्ताओं ने कहा कि इस अध्ययन के निष्कर्ष उम्र बढ़ने को धीमा करने, हृदय रोगों के बोझ को कम करने और जीवनकाल में सुधार के लिए संभावित दवा लक्ष्यों की ओर इशारा करते हैं। शोधकर्ताओं ने कहा, बदलाव से लगता है पता अध्ययन की वरिष्ठ लेखिका और मैकमास्टर की एसोसिएट प्रोफेसर मैरी पिगेयर ने बताया कि टीम ने इन स्थितियों का विश्लेषण कर यह समझने की कोशिश की कि उम्र बढ़ने की प्रक्रिया शरीर की रक्त वाहिकाओं को कैसे प्रभावित करती है। उन्होंने कहा कि आंख शरीर की रक्त प्रणाली की एक खिड़की की तरह है। आंखों की छोटी रक्त वाहिकाओं जो बदलाव होते हैं, वे अक्सर पूरे शरीर की छोटी नसों में हो रहे परिवर्तन का प्रतिबिंत होते है।

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