दो साल से कम के बच्चों के लिए प्रतिबंधित हो सकती है कफ सिरप
भारत में बच्चों के लिए कफ सिरप के उपयोग में बड़े बदलाव की संभावना है। स्वास्थ्य मंत्रालय दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप के प्रिस्क्रिप्शन पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है। यह कदम 2025 में हुई बच्चों की मौतों के मामलों के संदर्भ में उठाया जा रहा है।

नई दिल्ली, एजेंसी। देश में बच्चों के लिए कफ सिरप के उपयोग से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव संभव है। देश में दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए कफ सिरप के प्रिस्क्रिप्शन (डॉक्टर द्वारा अनुशंसा) को प्रतिबंधित किया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय कथित तौर पर इसे लेकर गंभीरतापूर्वक विचार कर रहा है। एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, इंडियन फार्माकोपिया कमीशन द्वारा जारी ‘नेशनल फॉर्म्युलरी ऑफ इंडिया 2026’ (एनएफआई) के हालिया ड्राफ्ट में स्पष्ट किया गया है कि दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए खांसी-जुकाम की दवाएं न तो दी जानी चाहिए, न ही लिखी जानी चाहिए।
इसके अलावा यह भी कहा गया है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बिना सावधानीपूर्वक चिकित्सकीय जांच और कड़ी निगरानी के ऐसी दवाओं की सिफारिश नहीं की जाती है। बता दें कि एनएफआई का यह ड्राफ्ट देश में डॉक्टरों और फार्मेसिस्टों के लिए एक दिशानिर्देशक की तरह काम करता है। एनएफआई ही दवाओं की खुराक, संकेत, निषेध और साइड इफेक्ट्स से जुड़ी जानकारी को मानकीकृत करता है। ऐसे में यह ड्राफ्ट बेहद अहम माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि एनएफआई की सिफारिशों का संज्ञान लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय प्रतिबंध से जुड़े निर्देश जारी कर सकता है। हालांकि, मंत्रालय की ओर से अब तक इससे जुड़ा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।पिछले साल हुई मौतों के बाद सतर्कताजानकारी के अनुसार, एनएफआई के ड्राफ्ट में ये सुझाव 2025 में बच्चों की मौतों के मामलों को देखते हुए दिया गया है। इन मौतों का संबंध खांसी-जुकाम की दवाओं में जहरीले डाइएथिलीन ग्लाइकोल (डीईजी) और एथिलीन ग्लाइकोल (ईजी) की मिलावट से था। ड्राफ्ट में ‘इंडियन फार्माकोपिया कमीशन’ ने मिलावट की समस्या से निपटने के लिए ग्लिसरीन, प्रोपलीन ग्लाइकोल, सॉर्बिटोल सॉल्यूशन और लिक्विड माल्टिटोल जैसे उच्च जोखिम वाले सहायक पदार्थों के मानकों को भी अपडेट किया है, क्योंकि इन सामग्रियों में डीईजी की अशुद्धियां हो सकती हैं।दवा कंपनियों पर जांच की जिम्मेदारीएनएफआई ड्राफ्ट में दवा कंपनियों पर इनपुट और अंतिम उत्पादों की स्वतंत्र रूप से जांच करने की जिम्मेदारी भी डाली गई है। कोशिश है कि पूरी आपूर्ति शृंखला में जवाबदेही सुनिश्चित की जा सके। निर्माताओं के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे फार्माकोपिया-ग्रेड सॉल्वैंट्स का उपयोग करें और अनुमोदित प्रयोगशालाओं में प्रमुख इनपुट और तैयार उत्पादों की बैच-वार कड़ी जांच करें, साथ ही इसका विस्तृत रिकॉर्ड भी रखें। ‘इंडियन ड्रग्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन’ सहित उद्योग से जुड़े संगठन, फीडबैक देने के लिए फिलहाल इस ड्राफ्ट की समीक्षा कर रहे हैं।चिकित्सक कर रहे स्वागतरिपोर्ट के अनुसार, एनएफआई के ड्राफ्ट में दिए गए सुझाव और निर्देशों का जन स्वास्थ्य विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने स्वागत किया है। उनका कहना है कि कफ सिरप शिशुओं को सीमित चिकित्सीय लाभ देते हैं, जबकि इनसे जुड़े जोखिम कहीं अधिक होते हैं। उन्होंने कहा कि खांसी एक स्वाभाविक सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया है। इसका इलाज लक्षणों को दबाने के बजाय इसके मूल कारणों पर केंद्रित होना चाहिए।
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