ब्यूरो:::संसद सत्र::विपक्ष के विरोध के बीच औद्योगिक संबंध संहिता संशोधन विधेयक संसद में पारित
औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद में पारित हुआ। विपक्ष ने नए श्रम कानूनों पर विरोध जताया, जबकि सरकार ने स्पष्ट किया कि कानून में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। नए कानून में न्यूनतम मजदूरी और ओवरटाइम वेतन जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो कर्मचारियों के हितों की रक्षा करते हैं।

हेडिंग विकल्प: विरोध के बीच संसद में पारित हुआ नया श्रम कानून पुराने श्रम कानूनों पर भ्रम खत्म करने के लिए लाया गया विधेयक विपक्ष ने नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों पर दर्ज कराया विरोध नई दिल्ली, विशेष संवाददाता औद्योगिक संबंध संहिता (संशोधन) विधेयक, 2026 संसद में पारित हो गया है। गुरुवार को विधेयक को लेकर लोकसभा और राज्यसभा में चर्चा हुई। विपक्ष ने विधेयक और नए श्रम संहिताओं के प्रावधानों पर कड़ा विरोध जताया, जिस पर सरकार की तरफ से सफाई दी गई कि इस विधेयक के जरिए कानून में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। सिर्फ पुराने कानूनों को वापस लेने का प्रावधान संहिता में जोड़ा जा रहा है, जिससे किसी भी तरह की कानूनी उलझन न हो।
कानून में बदलाव नहीं सदन में विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस संशोधन विधेयक के जरिये कानून में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। तीन पुराने कानूनों को वापस लेने का प्रावधान संहिता में जोड़ा जा रहा है। काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 करने के आरोपों पर कहा कि नई श्रम संहिताओं में सप्ताह में 48 घंटे से अधिक काम न लेने का प्रावधान है जो विश्व श्रम संगठन के मानकों के अनुरूप है। इसमें न्यूनतम मजदूरी को अनिवार्य बनाया गया है, जबकि पहले के कानून में यह सिर्फ एक निर्देश मात्र था, जिसका पालन करना या न करना राज्यों के ऊपर निर्भर था। नए कानून में हर कर्मचारी को नियुक्ति पत्र देना अनिवार्य किया गया है जिससे कंपनी दुर्घटना होने पर कर्मचारी की वित्तीय सुरक्षा से इंकार नहीं कर सकती। ओवरटाइम के लिए दोगुने वेतन का प्रावधान है। इस तरह से कर्मचारियों के हितों में कई अहम प्रावधान किए गए हैं। इस विधेयक के तहत संहिता की धारा 104 में संशोधन किया गया है। विपक्ष ने कई मुद्दों पर उठाए सवाल चर्चा के दौरान राज्यसभा में विपक्ष ने कई मुद्दों पर सवाल उठाए। सदन में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि छह साल पहले पारित चारों श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकार छीनने वाली हैं। इसके जरिए स्थाई नियुक्ति को समाप्त किया जा रहा है और काम के घंटे आठ से बढ़ाकर 12 किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि नए कानून पूरी तरह से मजदूरों के खिलाफ हैं। सरकार ने 23 सितंबर 2020 को विधेयक को बिना चर्चा के पारित किया था। यदि उस दिन चर्चा हुई होती तो विपक्ष जरूर बताता कि बिना पुराने कानून को वापस लिए नया कानून पारित नहीं किया जा सकता। अब उच्चतम न्यायालय के कहने पर यह संशोधन लाया गया है। तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन ने नए कानूनों को कॉरपोरेट कोड बताया। उन्होंने कहा कि इन कानूनों के माध्यम से श्रमिक संगठन बनाने का अधिकार छीना गया है। द्रमुक के आर. गिरिराजन ने कहा कि नई श्रम संहिताओं में श्रमिकों के हितों का ध्यान नहीं रखा गया है। हड़ताल और मिलकर अपनी मांग के लिए प्रबंधन पर दबाव बनाने का अधिकार छीन लिया गया है।

लेखक के बारे में
Hindustanलेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




