पेशेवर बदमाशों की बैरक से दूर रहेंगे पहली बार जेल जाने वाले
नई दिल्ली में जेलों में पहली बार अपराध करने वाले कैदियों के लिए नई व्यवस्था लागू की गई है। उन्हें पेशेवर अपराधियों से अलग रखा जाएगा। इसके तहत अलग वार्ड और अदालत में विशेष स्थान निर्धारित किए गए हैं। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर उठाया गया है और इसका उद्देश्य कैदियों के पुनर्वास को बढ़ावा देना है।

नई दिल्ली, वरिष्ठ संवाददाता। राजधानी की जेलों में नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत पहली बार अपराध करने में जेल पहुंचे कैदी पेशेवर और आदतन अपराधियों की बैरक से दूर रखे जाएंगे। ऐसे कैदियों के लिए अलग वार्ड तय किए गए हैं। नई व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नए कैदी पेशेवर अपराधियों के संपर्क में न आएं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम जेल सुधार प्रणाली को मजबूत करने और कैदियों के पुनर्वास में अहम भूमिका निभाएगा। जेल मुख्यालय की जारी गाइडलाइन के अनुसार अब ‘फर्स्ट टाइम ऑफेंडर’ की पहचान इस आधार पर की जाएगी कि संबंधित व्यक्ति पहली बार जेल में दाखिल हुआ है।
यदि न्यायिक हिरासत के दौरान उसके खिलाफ अन्य मामले भी दर्ज हो जाते हैं, तब भी उसे पहली बार अपराधी की श्रेणी में ही रखा जाएगा। ऐसे कैदियों को तिहाड़ की जेल नंबर-4 और मंडोली की जेल नंबर-12 में रखा जाएगा। इन्हें मुलाहिजा जेल भी कहा जाता है।अदालत भी अलग वैन से ले जाए जाएंगेजेल ही नहीं अब पहली बार अपराध करने वाले कैदियों को अदालत ले जाने और वापस लाने के लिए अलग वैन उपलब्ध कराई जाएगी। इसके अलावा, अदालत परिसरों में उनके लिए अलग स्थान निर्धारित करने की भी बात कही गई है। साथ ही प्रत्येक जेल में शाम के समय दो डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है, जिससे इन कैदियों का समय पर मेडिकल परीक्षण हो सके। जेल प्रशासन का मानना है कि इससे सुधारात्मक गतिविधियों में उनकी भागीदारी बढ़ेगी और वे अपराध की दुनिया से दूर रह सकेंगे।सुप्रीम कोर्ट के निर्देश उठाया कदमजेल प्रशासन ने यह नई व्यवस्था सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद लागू की है। पहली बार जेल जाने वाले कैदियों के अलावा ट्रांसजेंडर कैदियों के लिए भी अलग वार्ड की व्यवस्था की गई है, जहां उनकी पहचान के आधार पर उन्हें रखा जाएगा। वहीं, नजरबंद किए गए कैदियों को तिहाड़ की सेंट्रल जेल नंबर-7 में रखने के निर्देश दिए गए हैं।गंभीर अपराध करने वाले इनमें नहीं होंगे शामिलयह सुविधा आतंकवाद, नक्सलवाद, गैंगस्टर गतिविधियों या गंभीर आपराधिक मामलों में शामिल कैदियों को नहीं दी जाएगी। ऐसे कैदियों को हाई सिक्योरिटी या अन्य निर्धारित जेलों में ही रखा जाएगा। जेल प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी हालत में आदतन अपराधियों को मुलाहिजा जेल में स्थानांतरित नहीं किया जाएगा।पालन नहीं करने पर होगी कार्रवाईजेल प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा है। यदि कोई अधिकारी इस मामले में लापरवाही बरतते पाया जाता है, तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
लेखक के बारे में
Rajan Sharmaशॉर्ट बायो : राजन शर्मा पिछले 16 वर्षों से पत्रकारिता में सक्रिय हैं और वर्तमान में 'हिन्दुस्तान' में अपराध टीम में कार्यरत हैं।
परिचय एवं अनुभव
राजन शर्मा को पत्रकारिता में 16 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वर्तमान में वह ‘हिन्दुस्तान’ (हिन्दुस्तान टाइम्स ग्रुप) में अपराध टीम का हिस्सा हैं। इस भूमिका में रहते हुए उन्होंने कई ब्रेकिंग खबरें की हैं।
करियर का सफर (टीवी से प्रिंट पत्रकारिता)
राजन शर्मा ने अपने करियर की शुरुआत मुंबई जी न्यूज और जन संदेश दिल्ली के बाद प्रिंट पत्रकारिता में आए। उन्होंने प्रमुख हिंदी अखबार हरि भूमि, विराट वैभव, नवोदय टाइम्स, दैनिक भास्कर में अपनी सेवाएं दी हैं। वर्तमान में वह हिन्दुस्तान में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं।उन्हें अपराध और स्वास्थ्य से जुड़ी कवरेज के लिए जाना जाता है। मौजूदा समय में वह अपराध टीम का प्रमुख हिस्सा हैं।
शैक्षणिक पृष्ठभूमि
दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता में डिप्लोमा किया है।
विशेषज्ञता
अपराध, राजनीति, स्वास्थ्य और सामाजिक मुद्दों में विशेषज्ञता है।
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