‘बदलाव जरूरी था, पर हिंसा गलत
नेपाल में प्रदर्शन और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद भारत में रह रहे नेपाली युवाओं ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। उन्होंने बदलाव की आवश्यकता जताई, लेकिन विरोध के दौरान हुई हिंसा को गलत बताया।...

नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में भड़के व्यापक प्रदर्शनों और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के इस्तीफे के बाद अंतरिम सरकार के गठन को लेकर भारत में रह रहे नेपाल मूल के जेन-जी युवाओं की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। उनका कहना है कि बदलाव जरूरी था, लेकिन विरोध के दौरान हुई हिंसा और आगजनी ने सही आंदोलन की तस्वीर बिगाड़ दी। दिल्ली में जन्मी और पली-बढ़ी 24 वर्षीय सुलेखा शाह (बदला हुआ नाम) ने कहा, ओली सरकार का जाना आवश्यक था। युवाओं की आवाज दबाई जा रही थी और करदाताओं का पैसा नेताओं की ऐशो-आराम की जिंदगी पर खर्च हो रहा था। लेकिन प्रदर्शनकारियों द्वारा संसद भवन और सिंह दरबार जैसे प्रतीकात्मक भवनों को आग के हवाले करना सही नहीं था।
उन्होंने उम्मीद जताई कि सुशीला कार्की के नेतृत्व में बनी अंतरिम सरकार से हालात बेहतर होंगे। सुलेखा ने कहा, कार्की भारत को लेकर अलग नजरिया रखती हैं, इसलिए मुझे उम्मीद है कि दोनों देशों के रिश्ते सुधरेंगे। काठमांडू में रहने वाले उनके 20 वर्षीय चचेरे भाई आदित्य शाह का कहना है कि आंदोलन केवल सोशल मीडिया बैन के खिलाफ नहीं था, बल्कि भ्रष्टाचार और करदाताओं के पैसे की बर्बादी के खिलाफ भी था। आदित्य ने फोन पर बताया, युवाओं ने नेताओं की विलासिता पर सवाल उठाए। जब सरकार ने सोशल मीडिया पर रोक लगाने का ऐलान किया तो आंदोलन और तेज हो गया। लेकिन तोड़फोड़ और आगजनी से नुकसान जनता का ही हुआ है।
लेटेस्ट Hindi News , बॉलीवुड न्यूज, बिजनेस न्यूज, टेक , ऑटो, करियर , और राशिफल, पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।




