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नीट-2024: यदि 0.001 फीसदी भी लापरवाही हुई है तो सख्ती से निपटा जाएगा- सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली। विशेष संवाददाता सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी...

नीट-2024: यदि 0.001 फीसदी भी लापरवाही हुई है तो सख्ती से निपटा जाएगा- सुप्रीम कोर्ट
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हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीTue, 18 Jun 2024 04:45 PM
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नई दिल्ली। विशेष संवाददाता
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) से कहा कि ‘यदि राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-यूजी) 2024 परीक्षा के आयोजन में किसी की ओर से 0.001 फीसदी की भी लापरवाही हुई है, तो उससे पूरी सख्ती से निपटा जाएगा। शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ‘कल्पना कीजिए यदि कोई फर्जीवाड़ा करके डॉक्टर बनता है तो वह समाज के लिए कितना खतरनाक होगा।

जस्टिस विक्रम नाथ और एसवीएन भट्टी की अवकाशकालीन पीठ ने धांधली का आरोप लगाकर दोबारा से नीट परीक्षा आयोजित करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर विचार करते हुए यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए देशभर में लाखों छात्र कड़ी मेहनत करते हैं, ऐसे में इस तरह की परीक्षा में नाममात्र की लापरवाही को भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस नाथ ने केंद्र सरकार और ‌राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) की ओर से पेश वकीलों से कहा कि ‘यदि किसी की ओर से नीट परीक्षा के आयोजन में 0.001 प्रतिशत की भी लापरवाही हुई है, तो उससे पूरी तरह निपटाना चाहिए। जस्टिस भट्टी ने कहा कि ‘हम सभी जानते हैं कि नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए देशभर के लाखों बच्चों को किस तरह की मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने कहा कि कल्पना कीजिए कि मेडिकल कॉलेजों में दाखिला को लेकर बनाए गए एक प्रणाली के साथ धोखाधड़ी करने वाला व्यक्ति यदि डॉक्टर बनता है, तो वह समाज के लिए और भी अधिक खतरनाक होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि हम छात्रों के कड़ी मेहनत को नजरअंदाज नहीं कर सकते। शीर्ष अदालत ने यह टिप्पणी में राजस्थान के कोटा के कोचिंग संचालक नितिन विजय और अन्य की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए की है।

नसीहत देते हुए एनटीए और केंद्र से मांगा जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (एनटीए) को नसीहत देते हुए नीट-यूजी 2024 दोबारा कराने सहित विभिन्न मांगों को लेकर दाखिल याचिकाओं पर जवाब मांगा। पीठ ने केंद्र व एनटीए की ओर से पेश वकीलों से कहा कि ‘छात्रों को इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है, इसे ध्यान में रखते हुए आपको ‌इससे संबंधित याचिकाओं को विरोधात्मक नहीं मानाना चाहिए। पीठ ने एनटीए की ओर से पेश अधिवक्ता वर्धमान कौशिक से कहा कि यदि ‘परीक्षा आयोजित करने के लिए जिम्मेदार एजेंसी का प्रतिनिधित्व करते हुए आपको दृढ़ रहना चाहिए। जस्टिस नाथ ने मौखिक तौर पर एनटीए के वकील से कहा कि परीक्षा के आयोजन में यदि कोई गलती या लापरवाही हुई है तो आपको इसे स्वीकार करनी चाहिए और दृढ़ता के साथ यह कहना चाहिए ‘हां, लापरवाही/गलती हुई है और हम कार्रवाई करने जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे आपके (एनटीए) कार्यकलाप को लोगों खासकर छात्रों में भरोसा तो जगेगा। इसके साथ ही, पीठ ने मामले में केंद्र और एनटीए को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर अपना अपना जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। शीर्ष अदालत ने इसके साथ ही कहा कि मामले की सुनवाई 8 जुलाई पहले लंबित मामलों के साथ की जाएगी। पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र और एनटीए से कहा कि वे नष्पिक्षता से काम करें। साथ ही एनटीए को आत्ममंथन करने की नसीहत देते हुए कहा कि समय पर कार्रवाई करने की जरूरत है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि नीट परीक्षा आयोजित करने की प्रक्रिया में कहां गलती हुई, इसका आसानी से पता लगाया जा सकता है। पीठ ने कहा कि अधिकांश उम्मीदवारों के प्रदर्शन का पता लगाएं, कोई भी आसानी से समझ सकता है कि कहां गलती हुई है। पीठ ने कहा कि कितने सेल फोन (मोबाइल) का इस्तेमाल किया गया, इसका पता लगाएं। साथ ही कहा कि स्पष्ट रूप से हम प्रतिक्रिया करते, लेकिन छुट्टियों में हम धीरे-धीरे प्रतिक्रिया कर रहे है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल याचिकाओं में नीट-यूजी 2024 के पेपर लीक होने सहित अन्य अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए दोबारा से परीक्षा कराने की मांग की गई है। साथ ही, परीक्षा में देरी के आधार पर कुछ छात्रों को अनुग्रह अंक दिए जाने में भी अनियमितता का आरोप लगाया गया। याचिका में कहा गया है कि यदि दोबारा से नीट परीक्षा का आयोजन नहीं किया गया तो यह 24 लाख बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने जैसा होगा।

समय से कार्रवाई करने की जरूरत

मामले की सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और एनटीए से कहा कि ‘हमें आपसे समय पर कार्रवाई की आवश्यकता है। इस पर केंद्र सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता कनु अग्रवाल ने पीठ से कहा कि 1563 छात्रों को दिए गए अनुग्रह अंक को रद्द कर दिया गया है। उन्होंने पीठ से कहा कि सरकार व एनटीए द्वारा पिछले सप्ताह लिया गया यह निर्णय दर्शाता है कि अधिकारी उम्मीदवारों द्वारा उठाई गई चिंताओं के प्रति सजग है। इस पर, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने कहा कि सरकार व एनटीए ने छात्रों को दिए गए अनुग्रह अंक को खत्म करके एक तरह से स्वीकार कर लिया है नीट 2024 में अनियमितताएं हुई है। एमबीबीएस, बीडीएस सहित स्नातक स्तरीय अन्य चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए एनटीए ने 5 मई को देशभर में 4,750 केंद्रों पर परीक्षा आयोजित की थी। इसमें लगभग 24 लाख छात्र शामिल हुए।

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