मंगल के करीब से गुजरा साइकी, कैद कीं अद्भुत तस्वीरें
नासा का अंतरिक्ष यान ‘साइकी’ मंगल ग्रह के बेहद करीब से गुजरते हुए एक शानदार परिक्रमा पूरा कर चुका है। यह यान मंगल से 4,609 किलोमीटर की दूरी पर से गुजरा और लाल ग्रह की आकर्षक तस्वीरें खींची। अब यह यान 2029 में धातु वाले क्षुद्रग्रह साइकी की ओर बढ़ रहा है।

आकार में यह अंतरिक्ष यान एक छोटी वैन जितना ही बड़ा है नई दिल्ली, एजेंसी। नासा का अंतरिक्ष यान ‘साइकी’ मंगल ग्रह के बेहद करीब से गुजरते हुए एक शानदार परिक्रमा पूरा कर चुका है।
यह यान सौर मंडल के रहस्यों को खोलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव
बीते दिनों यह यान मंगल ग्रह से सिर्फ 4,609 किलोमीटर की दूरी पर से गुजरा। इस दौरान उसने लाल ग्रह के आकर्षक क्लोज-अप तस्वीरें खींची, जिनमें विशाल ह्यूजेन्स क्रेटर सबसे खास रहा। वैज्ञानिकों ने इन तस्वीरों को असाधारण बताया है। यान मंगल को धूल भरी रोशनी में चमकते अर्धचंद्राकार के रूप में देख पाया, जो एक दुर्लभ नजारा था। नासा ने मंगल के गुरुत्वाकर्षण का इस्तेमाल ‘कॉस्मिक स्लिंगशॉट’ की तरह किया। इससे यान की गति हजार मील प्रति घंटा बढ़ गई और उसका रास्ता मंगल-बृहस्पति के बीच स्थित क्षुद्रग्रह बेल्ट की ओर मोड़ दिया गया। बिना अतिरिक्त ईंधन खर्च किए यान को तेज गति मिल गई। यान अब अपने मुख्य मिशन 16 साइकी नामक धातु वाले क्षुद्रग्रह की ओर बढ़ रहा है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि यह क्षुद्रग्रह किसी प्राचीन ग्रह का खुला हुआ धात्विक कोर हो सकता है
इसका अध्ययन पृथ्वी जैसे चट्टानी ग्रहों के अंदर छिपे रहस्यों को समझने में मदद करेगा। 2029 में यह यान क्षुद्रग्रह पर पहुंच जाएगा। वहां यह पहली बार किसी धातु से बने क्षुद्रग्रह का विस्तार से अध्ययन करेगा।
यह मिशन क्यों है खास
साइकी अंतरिक्ष यान आकार में एक छोटी वैन जितना है। यह क्षुद्रग्रह (ऐस्टरॉइड) के चारों ओर 26 महीने तक चक्कर लगाएगा। इस दौरान यान के उपकरणों से उस चट्टान को स्कैन किया जाएगा। इसके बाद यान साल 2031 में मिशन समाप्त कर देगा।
मंगल का यह रूप पहले नहीं दिखा
इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान साइकी के कैमरों ने मंगल की ऐसी तस्वीरें कैद कीं, जो किसी पेंटिंग जैसी लगती हैं। जब यान मंगल के रात वाले हिस्से से दिन की ओर बढ़ा तो धूल भरी सूरज की रोशनी में लिपटा लाल ग्रह एक चमकते हुए अर्धचंद्र की तरह दिखाई दिया। इन तस्वीरों में सबसे रोमांचक नजारा ह्यूजेन्स क्रेटर का था। मंगल की सतह पर मौजूद यह विशाल गड्ढा अंतरिक्ष वैज्ञानिकों के लिए हमेशा से कौतूहल का विषय रहा है, और साइकी ने इसके बेहद करीब के दृश्य साझा किए हैं।
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