‘बुलेट ट्रेन परियोजना की बढ़ी लागत का पूरा बोझ रेलवे पर नहीं’
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत बढ़ने का भार भारतीय रेलवे पर नहीं पड़ेगा। एनएचएसआरसीएल ने कहा कि कांग्रेस के आरोप तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। परियोजना की वित्तीय संरचना केंद्र और राज्य सरकारों की भागीदारी से लागू की जा रही है। इससे क्षेत्रीय विकास और तकनीकी प्रगति के लाभ मिलेंगे।

नई दिल्ली, एजेंसी। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की लागत बढ़ने का पूरा बोझ भारतीय रेलवे पर नहीं पड़ेगा। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने गुरुवार को यह स्पष्ट किया। कॉरपोरेशन ने ‘एक्स’ पर कांग्रेस की केरल इकाई के उस आरोप का जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि परियोजना की लागत बढ़कर 1.1 लाख करोड़ रुपये से 1.98 लाख करोड़ रुपये हो गई है। अतिरिक्त 90 हजार करोड़ रुपये का भार भारतीय रेलवे को उठाना पड़ेगा। एनएचएसआरसीएल ने कहा कि इस तरह के दावे तथ्यों पर नहीं बल्कि अटकलों और चुनिंदा व्याख्याओं पर आधारित हैं।एनएचएसआरसीएल के अनुसार प्रारंभिक लागत अनुमान करीब एक दशक पहले परियोजना के शुरुआती चरण में तैयार किया गया था।
बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में विस्तृत डिजाइन, इंजीनियरिंग, भूमि अधिग्रहण और निर्माण अनुबंध अंतिम होने के बाद लागत का पुनर्मूल्यांकन किया जाना सामान्य प्रक्रिया है।कॉरपोरेशन ने यह भी स्पष्ट किया कि परियोजना के वित्तपोषण को लेकर भारत और जापान के बीच व्यापक समझौता है और इसके तहत जापानी एजेंसी जाईका (जेआईसीए)से बेहद कम ब्याज दर और लंबी पुनर्भुगतान अवधि वाला ऋण मिल रहा है।एनएचएसआरसीएल ने कहा कि यह परियोजना उसकी विशेष वित्तीय संरचना के तहत केंद्र और संबंधित राज्य सरकारों की भागीदारी से लागू की जा रही है, इसलिए इसे भारतीय रेलवे की प्रत्यक्ष देनदारी मानना गलत है।कॉरपोरेशन के मुताबिक बुलेट ट्रेन परियोजना से समय की बचत, क्षेत्रीय आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति जैसे व्यापक आर्थिक लाभ मिलेंगे।
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