महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की पहली पहाड़ी सुरंग का काम पूरा: वैष्णव
केंद्र सरकार की मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत पालघर जिले में पहली हाई स्पीड टनल का काम सफलतापूर्वक पूरा हुआ। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह टनल 1.5 किलोमीटर लंबी है और बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी। परियोजना का 55 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। केंद्र सरकार की अति महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के तहत महाराष्ट्र स्थित पालघर जिले में पहली हाई स्पीड टनल का काम सफलतापूर्वक (ब्रेकथ्रू) संपन्न हो गया। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को रेल भवन में वीडियो क्रांफ्रेसिंग के जरिए इस कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कहा कि बुलेट ट्रेन 320 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से चलेगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बुलेट ट्रेन परियोजना को एक बड़ी उपलब्धि बताया। महाराष्ट्र की पहाड़ी में पहली हाई स्पीड टनल (टनल संख्या 5) की लंबाई 1.5 किलोमीटर है। यह टनल विरार-बोईसर स्टेशनों के बीच स्थित है। इसके पूर्व सितंबर 2025 में ठाणे और बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स (बीकेसी) के बीच पांच किलोमीटर लंबी देश की पहली अंडरग्राउंड हाई-स्पीड रेल टनल पूरी की गई।
उन्होंने कहा कि 1.5 किलोमीटर लंबी पहाड़ी टनल पालघर जिले की सबसे लंबी सुरंगों में शामिल है। यह महाराष्ट्र में बुलेट ट्रेन परियोजना की दूसरी सुरंग है जिसका कार्य पूरा हो चुका है। इससे पहले ठाणे और बीकेसी के बीच पांच किलोमीटर लंबी भूमिगत सुरंग का कार्य सितंबर 2025 में पूरा किया गया था। उन्होंने बताया कि मुंबई-अहमदाबाद के बीच 508 किलोमीटर लंबी बुलेट ट्रेन परियोजना गुजरात, महाराष्ट्र और दादरा एवं नगर हवेली से होकर गुजरती है। वैष्णव ने कहा कि जापान की तकनीक पर आधारित यह ट्रेन 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलेंगी और मुंबई से अहमदाबाद की सात से आठ घंटे की यात्रा को महज दो घंटे 17 मिनट में पूरा कर लेगी। परियोजना का 55 फीसदी काम पूरा रेल मंत्री ने बताया कि परियोजना की कुल अनुमानित लागत 1.08 लाख करोड़ रुपये है और इसका करीब 55 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। माउंटेन टनल-5 की खुदाई पूरी होना काफी बड़ी उपलब्धि है। बुलेट ट्रेन परियोजना में कुल सात पहाड़ी सुरंग हैं और एक सुरंग समुद्र के नीचे है। उन्होंने कहा कि इस परियोजना में कुल 12 स्टेशन हैं। इनमें महाराष्ट्र में मुंबई, ठाणे, विरार, बोईसर और गुजरात में वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद, अहमदाबाद और साबरमती शामिल हैं। मुंबई का टर्मिनल स्टेशन बीकेसी है। उन्होंने बताया कि इतनी दूरी के लिए आम तौर पर दो डिपो बनाए जाते हैं, लेकिन इस रेल परियोजना में तीन डिपो बने हैं। प्रोजेक्ट अर्थव्यवस्था बदलने का जरिया रेल मंत्री ने बताया कि यह प्रोजेक्ट केवल रफ्तार का नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था के बदलने का जरिया है। ट्रेन मध्यम वर्ग के लिए आरामदायक और बजट के अनुकूल होगी। निर्माण कार्य से हजारों लोगों को रोजगार मिल रहा है और भविष्य में नए आईटी व औद्योगिक हब बनेंगे। सड़क यातायात की तुलना में इस ट्रेन से 95 फीसदी कम कार्बन उत्सर्जन होगा, जो प्रकृति के लिए वरदान है। मुबंई-अहमदाबाद हाई स्पीड कॉरिडोर के पूरे प्रोजेक्ट में कुल 27.4 किमी लंबी सुरंगें बनाई जा रही हैं। समुद्र के नीचे टनल, यह इस प्रोजेक्ट का सबसे रोमांचक हिस्सा है। ठाणे क्रीक के पास 21 किमी लंबी भूमिगत सुरंग बनाई जा रही है, जिसमें से 7 किमी का हिस्सा समुद्र के नीचे होगा। यह भारत की पहली समुद्री सुरंग होगी, जबकि पहाड़ी पर कुल 8 टनल बनाई जा रही हैं। इसमें महाराष्ट्र में 7 टनल है। इनकी कुल लंबाई लगभग 6.05 किमी है। गुजरात में वलसाड के जरोली गांव के पास 350 मीटर लंबी टनल का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। गुजरात में तेजी से हो रहा पुलों का काम बुलेट ट्रेन के रास्ते में गुजरात और महाराष्ट्र की कई बड़ी नदियां आती हैं। गुजरात में पुलों का काम बहुत तेजी से चल रहा है। नर्मदा नदी (भरूच) पर प्रोजेक्ट का सबसे लंबा पुल (1.2 किलोमीटर) है। ताप्ती नदी (सूरत) पर पुल का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है। माही नदी (आनंद/वडोदरा) पर भी बड़ा पुल का निर्माण किया गया है। अन्य नदियां जैसे साबरमती, पूर्णा, अंबिका, औरैया और विश्वामित्री नदियों पर भी महत्वपूर्ण पुल बनाए जा रहे हैं। गुजरात की लगभग सभी प्रमुख नदियों पर गर्डर लॉन्चिंग का काम एडवांस स्टेज में है।

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