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 जी-20 पैकेज: दुनिया पुराने विकास मॉडल को बदले: मोदी

जी-20 पैकेज: दुनिया पुराने विकास मॉडल को बदले: मोदी

संक्षेप:

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जोहानिसबर्ग में जी-20 शिखर सम्मेलन में पुराने विकास मॉडल पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मादक पदार्थ-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने, वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रतिक्रिया दल और पारंपरिक ज्ञान भंडार बनाने की पहल की। मोदी ने अफ्रीका में 10 लाख प्रशिक्षकों को तैयार करने का लक्ष्य भी रखा।

Sat, 22 Nov 2025 08:09 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जोहानिसबर्ग, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में शनिवार को जी-20 शिखर सम्मेलन के पहले सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अब वक्त आ गया है कि दुनिया पुराने विकास मॉडल पर दोबारा सोचे। उन्होंने कहा कि पारंपरिक मॉडल ने बड़ी आबादी को संसाधनों से दूर रखा है और प्रकृति का नुकसान भी किया है। इसका सबसे ज्यादा असर अफ्रीका झेल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यहां जी-20 नेताओं के 20वें सम्मेलन में मादक पदार्थ-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने के लिए जी-20 पहल तथा एक ‘वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रतिक्रिया दल’ बनाने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने जी-20 नेताओं से अपील की कि सभी को वैश्विक संस्थाओं में ग्लोबल साउथ की आवाज को बुलंद करने के लिए मिलकर प्रयास करने चाहिए।

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उन्होंने कहा, पिछले कई दशकों में जी-20 ने वैश्विक वित्त और वैश्विक आर्थिक विकास को दिशा दी है, लेकिन विकास के जिन मानकों पर अब तक काम हुआ है, उनके कारण बहुत बड़ी आबादी संसाधनों से वंचित रह गई है। साथ ही, प्रकृति के अत्यधिक दोहन को भी बढ़ावा मिला है। अफ्रीका इसका बहुत बड़ा भुक्तभोगी है। आज जब अफ्रीका पहली बार जी-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, तो यहां हमें विकास के मापदंड पर फिर से विचार करना चाहिए। इसके समाधान का उपाय बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका एक रास्ता भारत के सभ्यतागत मूल्यों में है और इसमें हमें मानव, समाज और प्रकृति को एक व्यापक रूप में देखना होगा। इससे प्रगति और प्रकृति के बीच सौहार्द संभव होगा। मोदी ने ‘समावेशी और सतत आर्थिक विकास, जिसमें कोई पीछे न छूटे’ विषय पर आयोजित सत्र में कहा, अब हमारे लिए अपने विकास मानदंडों पर पुनर्विचार करने और समावेशी एवं सतत विकास पर ध्यान केंद्रित करने का सही समय है। उन्होंने कहा कि दुनिया में कई समुदायों ने अपने पारंपरिक और पर्यावरण संतुतिल जीवनशैली को संभाल कर रखा है। इन परंपराओं में निरंतरता तो दिखती ही है, साथ ही इनमें, सांस्कृतिक ज्ञान, सामाजिक एकता और प्रकृति के प्रति गहरे सम्मान के भी दर्शन होते हैं। मोदी ने इसके उपाय के रूप में भारतीय ज्ञान प्रणाली पहल के आधार पर ‘वैश्विक पारंपरिक ज्ञान कोष’ के गठन का प्रस्ताव किया। उन्होंने कहा, भारत का प्रस्ताव है कि जी-20 के तहत एक वैश्विक पारंपरिक ज्ञान कोष बनाया जाए। भारतीय ज्ञान प्रणाली पहल, इसका आधार बन सकती है। यह वैश्विक मंच मानवता के ‘सामूहिक ज्ञान’ को भावी पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद करेगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि मादक पदार्थों की तस्करी, विशेषकर फेंटानिल जैसे अत्यंत खतरनाक पदार्थों के प्रसार की चुनौती से निपटने के लिए भारत ने मादक पदार्थ-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने के लिए जी-20 पहल का प्रस्ताव रखा है। उन्होंने कहा, आइए मिलकर इस भयावह नशा-आतंक गठजोड़ को कमजोर करें। - भारत हमेशा अफ्रीका के साथ एकजुटता से खड़ा रहा मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘मैंने सर्वांगीण विकास के हमारे सपने को साकार करने के लिए कुछ कार्ययोजनाएं पेश कीं। उनमें से पहली है जी20 वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार का निर्माण। इस संबंध में भारत का इतिहास समृद्ध है। इससे हमें अपने सामूहिक ज्ञान को बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।’ उन्होंने कहा कि अफ्रीका की प्रगति दुनिया की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए उन्होंने जी-20-अफ्रीका कौशल विकास पहल का प्रस्ताव रखा। मोदी ने कहा, भारत हमेशा अफ्रीका के साथ एकजुटता से खड़ा रहा है। मुझे इस बात पर गर्व है कि भारत की जी-20 अध्यक्षता के दौरान ही अफ्रीकी संघ जी-20 का स्थायी सदस्य बना। 10 लाख प्रशिक्षक तैयार करना लक्ष्य मोदी ने कहा, हमारा सामूहिक लक्ष्य अगले दशक के भीतर अफ्रीका में 10 लाख प्रमाणित प्रशिक्षक तैयार करना होना चाहिए। उन्होंने जी-20 वैश्विक स्वास्थ्य सेवा प्रतिक्रिया दल बनाने का भी प्रस्ताव रखा। प्रधानमंत्री ने कहा, स्वास्थ्य आपातस्थितियों और प्राकृतिक आपदाओं का सामना करते समय जब हम मिलकर काम करते हैं, तो हम और भी मजबूत होते हैं। हमारा प्रयास साथी जी20 देशों से प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों की टीम तैयार करना होना चाहिए, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत तैनाती के लिए तैयार रहें। --- दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति ने किया मोदी का स्वागत प्रधानमंत्री मोदी के शनिवार को जोहानिसबर्ग में जी20 शिखर सम्मेलन स्थल पर पहुंचने पर दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। -- प्रधानमंत्री मोदी ने गुटेरस, स्टार्मर, मेलोनी विश्व के कई नेताओं से मुलाकात की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जी-20 शिखर सम्मेलन से इतर ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर, संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरस, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी, फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों एवं कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्यांग से मुलाकात की। मोदी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, जोहानिसबर्ग में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से मिलना बहुत अच्छा रहा। इस साल भारत-ब्रिटेन भागीदारी में नई ऊर्जा आई है। हम इसे कई क्षेत्रों में आगे बढ़ाते रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरस के साथ उनकी ‘बहुत सार्थक’ बातचीत हुई। -- मोदी की ओर से प्रस्तावित चार प्रमुख पहल 1. ड्रग-आतंकवाद गठजोड़ का मुकाबला करने के लिए : घातक सिंथेटिक ड्रग्स जैसे फेंटानिल के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए मोदी ने वित्तीय, सुरक्षा और प्रशासनिक प्रयासों को एकजुट कर ड्रग-तस्करी नेटवर्क को तोड़ने और आतंकवाद के फंडिंग स्रोतों को कमजोर करने पर बल दिया। 2. अफ्रीका स्किल इनिशिएटिव: : ट्रेन-द-ट्रेनर्स मॉडल पर आधारित इस पहल का लक्ष्य अगले 10 वर्षों में अफ्रीका में 10 लाख प्रमाणित प्रशिक्षक तैयार करना है, जो आगे लाखों युवाओं को कौशल प्रदान करेंगे। 3. वैश्विक पारंपरिक ज्ञान भंडार: दुनियाभर की पारंपरिक, पर्यावरण-संतुलित और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध जीवन प्रणालियों का दस्तावेजीकरण कर भावी पीढ़ियों तक सुरक्षित रूप से ले जाने का प्रस्ताव। 4. जी20 ग्लोबल हेल्थकेयर रिस्पांस टीम: स्वास्थ्य आपदाओं और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान तेजी से तैनाती के लिए जी20 देशों के प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों की एक संयुक्त टीम बनाने का प्रस्ताव। ---------- ट्रंप के बहिष्कार के बावजूद जी-20 घोषणा पत्र मंजूर ट्रंप ने जी20 समिट के मुख्य एजेंडे को खारिज कर दिया है। दक्षिण अफ्रीका चाहता था कि जी20 देश गरीब देशों की जलवायु आपदा से लड़ने में मदद करें, साफ ऊर्जा की ओर बढ़ें और विकासशील देशों के कर्ज के बोझ को कम करें। हालांकि, ट्रंप के बहिष्कार के बावजूद जी20 देशों ने साउथ अफ्रीका के बनाए घोषणा पत्र को सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया है। दक्षिण अफ्रीकी राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने बताया कि सभी देशों का अंतिम बयान पर सहमत होना बेहद जरूरी था, भले ही अमेरिका इसमें शामिल नहीं हुआ। शुक्रवार को जी20 देशों ने बिना अमेरिकी भागीदारी के ही घोषणा पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर लिया था। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने इसे शर्मनाक कदम बताया।