पहाड़ों की दुश्वारियों को कम कर रहा रेलवे
पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम अब भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ गया है। बैराबी–सैरांग रेललाइन ने यात्रा और माल ढुलाई की कठिनाइयों को कम किया है। इस परियोजना में 51.38 किलोमीटर लंबी रेललाइन और सुरक्षा सुविधाओं...

नई दिल्ली, एजेंसी। पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम अब सीधे भारतीय रेलवे नेटवर्क से जुड़ गया है। बैराबी–सैरांग रेललाइन ने राज्य के पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा और माल ढुलाई की कठिनाइयों को काफी हद तक कम कर दिया है। 51.38 किलोमीटर लंबी इस लाइन के निर्माण के दौरान इंजीनियरों ने पहाड़ों को काटकर ढलानों पर पुल बनाए और लगातार बारिश व चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों का सामना किया। अब राजधानी आइजोल के पास सैरांग स्टेशन से दिल्ली, कोलकाता और गुवाहाटी के लिए सीधी ट्रेनें संचालित होने लगी हैं। सिर्फ सड़क-हवाई मार्ग से जुड़ी थी राजधानी अब तक मिजोरम की राजधानी आइजोल सिर्फ सड़क और हवाई मार्ग से देश के बाकी हिस्सों से जुड़ी हुई थी।
रेल नेटवर्क से दूरी की वजह से लोगों को यात्रा और माल ढुलाई में काफी कठिनाइयां झेलनी पड़ती थीं। नई रेल लाइन शुरू होने से यह कमी पूरी हो गई है। सैरांग स्टेशन को इस लाइन का टर्मिनस बनाया गया है, जो आइजोल से मात्र 12 किलोमीटर दूर है। चुनौतीपूर्ण परियोजना रेल कॉरिडोर को बनाने में कई साल लगे और इंजीरियरों को बेहद कठिन भौगोलिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। इसे तैयार करने के लिए पहाड़ों को काटा गया, ढलानों पर पुल खड़े किए गए और लगातार बारिश के बीच सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा गया। इस लाइन पर बने हैं... 45 सुरंगें 55 बड़े पुल 87 छोटे पुल 05 रोड ओवरब्रिज 06 अंडरपास दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पियर पुल इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि पुल संख्या 196 है, जिसे दुनिया का सबसे ऊंचा रेल पियर पुल माना जा रहा है। इसकी ऊंचाई 114 मीटर है, जो कुतुब मीनार से भी ऊंची है। पहाड़ी इलाके में इसका निर्माण रेलवे इंजीनियरों के लिए बड़ी चुनौती था, लेकिन अब यह पूरे प्रोजेक्ट की शान बन गया है। रेल पियर पुल दरअसल एक ऐसा रेलवे पुल होता है, जिसमें पुल को सहारा देने के लिए बहुत ऊंचे-ऊंचे पिलर बनाए जाते हैं। आमतौर पर ये पुल नदी, घाटी या गहरी खाई के ऊपर बनाए जाते हैं। सुरक्षा और सुविधा का विशेष ध्यान इस लाइन पर सुरक्षा और सुविधा पर विशेष ध्यान दिया गया है। आधुनिक सिग्नल सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और स्टेशनों पर यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं वाले इंतजाम किए गए हैं। इससे यात्रियों को सुरक्षित और आरामदायक सफर मिलेगा। ---- नई ट्रेनों की सौगात सैरांग-नई दिल्ली राजधानी एक्सप्रेस सैरांग-गुवाहाटी एक्सप्रेस सैरांग-कोलकाता एक्सप्रेस ---- ये फायदे होंगे 1. स्थानीय जनता को सीधा लाभ मिजोरम का इलाका पहाड़ी है, जिससे सड़क यात्रा महंगी और समय लेने वाली साबित होती है। रेल लाइन बनने से यहां के लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों का सामान अब सस्ता और समय पर मिल सकेगा। किसानों को अपनी उपज बड़े बाजारों तक पहुंचाने का आसान साधन मिलेगा। इससे व्यापार और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। 2. पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा मिजोरम प्राकृतिक सुंदरता, झरनों और पहाड़ों के लिए जाना जाता है। नई रेल लाइन से यहां पहुंच आसान होगी और पर्यटन को नई रफ्तार मिलेगी। होटल, गाइड और स्थानीय हस्तशिल्प उद्योग को सीधा लाभ होगा। 3. पूर्वोत्तर को नई पहचान पूर्वोत्तर की कनेक्टिविटी को मजबूत करना केंद्र सरकार की प्राथमिकता रही है। असम, त्रिपुरा, मणिपुर और अरुणाचल प्रदेश के बाद अब मिजोरम भी भारतीय रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। यह कदम पूरे पूर्वोत्तर को मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
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