मिजोरम कैबिनेट ने फिर भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने का किया विरोध
- म्यांमार के चिन समुदाय के साथ जातीय व सामाजिक जुड़ाव की दुहाई दे रहे हैं मिजोरम के लोग

- म्यांमार के चिन समुदाय के साथ जातीय व सामाजिक जुड़ाव की दुहाई आइजोल, एजेंसी। मिजोरम कैबिनेट ने भारत-म्यांमार सीमा पर बाड़ लगाने की केंद्र सरकार की योजना का फिर से विरोध किया है। मिजोरम के प्रभावशाली सामाजिक संगठन म्यांमार के चिन समुदाय के साथ जातीय जुड़ाव को लेकर इसका विरोध कर रहे हैं। यही कारण है कि राज्य सरकार केंद्र के निर्णय का विरोध कर रही है। हालांकि, कैबिनेट ने यह भी माना है कि उसके पास केंद्र के इस कदम को रोकने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। मुख्यमंत्री लालदुहोमा की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में अंतरराष्ट्रीय सीमा के 510 किलोमीटर लंबे मिजोरम सेक्टर पर बाड़ लगाने के खिलाफ राज्य सरकार के रुख की पुष्टि की गई।
इससे पहले बीते साल फरवरी में मिजोरम विधानसभा द्वारा सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास किया गया था, जिसमें सीमा पर बाड़ लगाने और म्यांमार के साथ फ्री मूवमेंट रिजीम (एफएमआर) को खत्म करने के केंद्र के प्रस्ताव का विरोध किया गया था। - म्यांमार से सीमा साझा करते हैं छह जिले मिजोरम के छह जिलों म्यांमार के चिन राज्य के साथ सीमा साझा करते हैं। यहां के सामाजिक संगठनों का कहना है कि उनके चिन लोगों के साथ वर्षों पुराने जातीय और सामाजिक संबंध है। इसलिए, बाड़ लगाने से उनके बीच गहरा सामाजिक व मनोवैज्ञानिक अलगाव होगा। इसको लेकर मिजो जिरलाई पाव्ल और जो रीयूनिफिकेशन ऑर्गनाइजेशन (जोरो) जैसे संगठन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी पत्र लिख चुके हैं। म्यांमार में सैन्य तख्ता पलट के बाद लगभग 30 हजार चिन लोग मिजोरम में रह रहे हैं।
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