वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज पर एनएमसी के कदम का स्वागत
राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) ने श्री माता वैष्णो देवी मेडिकल इंस्टीट्यूट से पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति वापस ले ली है। भाजपा ने फैसले का स्वागत किया है, जबकि नेशनल कॉन्फ्रेंस और पीडीपी ने इसे बड़ा झटका बताया। एनएमसी ने कहा कि छात्रों को अन्य मेडिकल संस्थानों में भेजा जाएगा।

जम्मू, एजेंसी। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) द्वारा श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस से पाठ्यक्रम संचालन की अनुमति वापस लेने के फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा ने जहां इस कदम का स्वागत किया है, वहीं सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस और विपक्षी पीडीपी ने इसे बड़ा झटका करार दिया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि हम फैसले का स्वागत करते हैं, लेकिन साथ ही छात्रों का भविष्य भी सुरक्षित चाहते हैं। कहा कि छात्रों को मेरिट के आधार पर दाखिला मिला था। इसे लेकर कोई दोराय नहीं है, न ही मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला सरकार को कोई दोष दिया गया है।
यह सिर्फ स्थानीय लोगों के अधिकार की बात है। उधर, आंदोलन समिति ने मिठाई बांटकर फैसले का जश्न मनाया। संयोजक कर्नल (रिटायर्ड) सुखवीर सिंह मनकोटिया ने कहा कि हम अपना 45 दिन लंबा आंदोलन वापस ले रहे हैं। लेकिन हम श्राइन बोर्ड की एक्टिविटीज पर नजर रखेंगे, जिसे सरकारी कामों में दखल देने के बजाय सिर्फ हिंदुओं की भलाई के लिए काम करना चाहिए। वहीं, नेशनल कॉन्फ्रेंस के मीडिया प्रभारी (पीर पंजाल) विवेक शर्मा ने कहा कि मेडिकल कॉलेज का बंद होना जम्मू के लिए एक बड़ा झटका है। कहा कि कुछ लोगों ने बांटने की साजिश के तहत झूठी कहानियां फैलाईं। वहीं, पीडीपी प्रवक्ता आदित्य गुप्ता ने कहा कि मेडिकल कॉलेज बंद होने के लिए भाजपा और नेशनल कॉन्फ्रेंस जिम्मेदार हैं। नवंबर से चल रहा था आंदोलन मेडिकल कॉलेज में दाखिलों को लेकर नवंबर से आंदोलन शुरू हुआ था। भाजपा समर्थित प्रदर्शनकारी संगठनों का आरोप था कि एमबीबीएस में 50 छात्रों को नीट मेरिट के जरिए दाखिले मिले। इनमें से 42 मुस्लिम (अधिकतर कश्मीर से) जबकि जम्मू से सिर्फ सात हिंदू और एक सिख छात्र थे। उन्होंने दाखिले रद्द करने और हिंदू-सिख छात्रों के लिए सीटें आरक्षित करने की मांग उठाई थी। छात्रों को दूसरे संस्थानों में भेजेंगे एनएमसी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए कॉलेज में दाखिला पाने वाले छात्रों को केंद्र शासित प्रदेश की सक्षम प्रशासनिक इकाई की मदद से जम्मू-कश्मीर के दूसरे मेडिकल संस्थानों में अतिरिक्त सीटों पर भेजा जाएगा।
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