
उम्मीद : नई वैक्सीन से होगा टीबी का सफल इलाज
संक्षेप: एमआईटी वैज्ञानिकों ने खोजे टीबी के नए टीके के लिए महत्वपूर्ण 'एंटीजन' 4,000
एमआईटी वैज्ञानिकों ने खोजे टीबी के नए टीके के लिए महत्वपूर्ण 'एंटीजन' 4,000 से अधिक प्रोटीनों की जांच करके खोजे एंटीजन कैंब्रिज, एजेंसी। अमेरिका स्थित मैसाचुसेट्स तकनीकी संस्था के वैज्ञानिकों ने टीबी के खिलाफ प्रभावी नया टीका बनाने में सफलता हासिल की है। उन्होंने टीबी पैदा करने वाले बैक्टीरिया में 4,000 से अधिक प्रोटीनों की जांच करके ऐसे कई संभावित एंटीजन (शरीर में आने वाले अजनबी पदार्थ हैं, जो हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय करते हैं) खोजे हैं, जिनका उपयोग एक नया और अधिक असरदार टीका विकसित करने में किया जा सकता है। टीबी पैदा करने वाला जीवाणु ‘माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस’ लगभग 4,000 अलग-अलग प्रोटीन बनाता है।

इन हजारों प्रोटीनों में से केवल उन प्रोटीनों को चुनना एक बड़ी चुनौती है, जो टीके के रूप में इस्तेमाल होने पर मजबूत प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया पैदा कर सकें। टीका तभी प्रभावी होता है, जब वह प्रतिरक्षा कोशिकाओं, जिन्हें टी कोशिकाएं (टी सेल्स) कहा जाता है, को सक्रिय करे। ये टी कोशिकाएं ही संक्रमण से लड़ने के लिए सेना के रूप में काम करती हैं। वैज्ञानिकों ने इसके लिए एक स्मार्ट तरीका अपनाया है। उन्होंने यह जानने की कोशिश की कि 4,000 प्रोटीनों में से कौन से प्रोटीन वास्तव में संक्रमित मानव कोशिकाओं की सतह पर दिखाई देते हैं। शोधकर्ताओं ने मानव प्रतिरक्षा कोशिकाओं (फैगोसाइट्स) को टीबी बैक्टीरिया से संक्रमित किया।संक्रमण के बाद, टीबी प्रोटीन पेप्टाइड्स नामक छोटे टुकड़ों में कट जाते हैं। ये पेप्टाइड्स फिर एमएचसी प्रोटीन द्वारा कोशिका की सतह पर प्रदर्शित किए जाते हैं। ये एमएचसी-पेप्टाइड कॉम्प्लेक्स एक सिग्नल के रूप में काम करते हैं जो टी कोशिकाओं को सक्रिय करते हैं। वैज्ञानिकों ने मास स्पेक्ट्रोमेट्री का उपयोग करके इन पेप्टाइड्स की पहचान की। उन्होंने 13 प्रोटीनों से 27 टीबी पेप्टाइड्स खोजे, जो संक्रमित कोशिकाओं में सबसे अधिक बार दिखाई दिए। जब इन पेप्टाइड्स का परीक्षण उन लोगों के रक्त के नमूनों पर किया गया, जो पहले टीबी से संक्रमित हो चुके थे तो 24 पेप्टाइड्स ने टी कोशिकाओं में मजबूत प्रतिक्रिया उत्पन्न की। शोधकर्ताओं ने पाया कि टीका उम्मीदवारों में टाइप 7 स्राव प्रणाली नामक प्रोटीन के एक वर्ग से कई पेप्टाइड शामिल थे। ये प्रोटीन टीबी बैक्टीरिया को फ़ैगोसाइट्स की झिल्लियों को तोड़ने में मदद करते हैं। इस शोध का सबसे रोमांचक पहलू यह है कि वैज्ञानिकों ने इन लक्ष्यों का उपयोग करके एमआरएनए टीके (एमआरएनए वैक्सिन) विकसित किए। यह उसी तकनीक पर आधारित है जिसका उपयोग कोरोना के टीकों में किया गया था। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन एमआरएनए टीकों को लाइसोसोम (कोशिकाओं के भीतर के अंग) को लक्षित करने के लिए डिज़ाइन किया गया था, वे सबसे प्रभावी थे। उन्होंने देखा कि ये टीके अन्य टीकों की तुलना में टीबी पेप्टाइड्स की एमएचसी प्रस्तुति को 1,000 गुना तक बढ़ा देते हैं। शोधकर्ता वर्तमान में आठ प्रोटीनों के मिश्रण पर काम कर रहे हैं, जिनके बारे में उनका मानना है कि यह संयोजन अधिकांश लोगों को टीबी से प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकता है। हालांकि मनुष्यों पर परीक्षण में अभी कई साल लगेंगे, यह अध्ययन दुनिया के सबसे पुराने और सबसे घातक संक्रामक रोग के खिलाफ एक नया और प्रभावी टीका खोजने की दिशा में एक बड़ी छलांग है। बॉक्स - हर साल मर रहे 10 लाख लोग टीबी हर साल दुनिया भर में 10 लाख से ज्यादा लोगों की जान लेता है। वर्तमान में टीबी के लिए केवल एक ही टीका उपलब्ध है, जिसे बीसीजी (बीसीजी) के नाम से जाना जाता है। यह टीका गायों में टीबी पैदा करने वाले जीवाणु का कमजोर संस्करण है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह टीका वयस्कों को फेफड़ों की टीबी से पर्याप्त सुरक्षा नहीं दे पाता है, इसलिए एक बेहतर और आधुनिक टीके की तत्काल आवश्यकता है।

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