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सीलिंग बढ़ने के बावजूद निगम का घटा राजस्व

नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता

दिल्ली में चल रही सीलिंग की कार्रवाई के बीच राजधानी के सबसे अमीर दक्षिणी नगर निगम के राजस्व में भारी गिरावट हुई है। दक्षिणी निगम के पास जनवरी में जहां 139 करोड़ का कन्वर्जन और पार्किंग शुल्क जमा हुआ था, वहीं, फरवरी में यह राशि घटकर 29 करोड़ के लगभग ही रह गई। मार्च के महीने में भी अभी तक इसमें खास उछाल नहीं देखा जा रहा है। गौरतलब है कि सीलिंग की सबसे ज्यादा मार दक्षिणी दिल्ली के इलाकों में ही पड़ रही है।

खौफ में हैं व्यापारी : 22 दिसंबर 2017 को डिफेंस कॉलोनी से शुरू हुई सीलिंग के बाद दिल्ली भर के व्यापारियों में हड़कंप मच गया। इसके डर से दिसंबर में ही व्यापारियों में कन्वर्जन और पार्किंग शुल्क जमा कराने की होड़ लग गई। दिसंबर महीने में दक्षिणी निगम के पास 73.84 करोड़ रुपये का कन्वर्जन और पार्किंग शुल्क जमा कराया गया।

जनवरी महीने में इसमें और इजाफा हुआ और 139.81 करोड़ का कन्वर्जन और पार्किंग शुल्क निगम के पास जमा कराया गया, जबकि, फरवरी महीने में इसमें एकदम से गिरावट दर्ज की गई। इसका बड़ा कारण यह भी है कि व्यापारियों को लगने लगा है कि शुल्क जमा करने का कोई फायदा नहीं है। इसके बाद भी वे सीलिंग की कार्रवाई से नहीं बच पाएंगे।

करोड़ों का कारोबार भी प्रभावित : सीलिंग को लेकर दिल्ली के व्यापारियों में लगातार आक्रोश देखा जा रहा है। इसके खिलाफ दिल्ली के व्यापारी अब तक कुल चार दिन दिल्ली बंद कर चुके हैं। सबसे पहले 23 जनवरी को एक दिन का बंद आयोजित किया गया था। जबकि, 2 व 3 फरवरी को 48 घंटे का बंद आयोजित किया गया। इसके बावजूद सीलिंग पर रोक नहीं लगने पर 13 मार्च को भी दिल्ली बंद का आयोजन किया गया। व्यापारियों द्वारा आहूत इन सभी बंद को बाजारों में खासी सफलता मिली है और शाम के समय तक लगभग दुकानें बंद रहीं। इससे करोड़ों के कारोबार का नुकसान हुआ है।

घाटे के ये दो बड़े कारण

1. निगम के अफसरों की मानें तो सीलिंग की शुरुआत में व्यापारियों को लगा कि जल्द से जल्द शुल्क जमा कराकर राहत प्राप्त कर लेनी चाहिए। हालांकि बाद में उन्हें लगा कि सरकार कोई ना कोई रास्ता निकाल लेगी और सीलिंग से राहत मिल जाएगी। इस कारण शुल्क जमा करने में सुस्ता आ गई।

2. पिछले दो महीने में (अमर कॉलोनी में हुई कार्रवाई को छोड़ दें तो) सीलिंग की गाज ज्यादातर स्टिल्ट पार्किंग को लेकर गिरी है। व्यावसायिक प्रतिष्ठान सील होने पर तुरंत आर्थिक नुकसान होता है, इसलिए व्यापारी शुल्क जमा करा देते हैं, लेकिन स्टिल्ट पार्किंग की सीलिंग से नुकसान कम होता है। मकान मालिक कन्वर्जन आौर पार्किंग शुल्क जमा कराने में भी ढिलाई बरतते हैं।

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