
विभाजन का विरोध करने का हमारे बुज़ुर्गों का रुख पूरी तरह सही था: महमूद मदनी
नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता जामिअत उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि
नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता जामिअत उलमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि जामिअत के बुज़ुर्गों ने भारत के विभाजन का जो विरोध किया था, वह पूरी तरह दूरदर्शी और सही निर्णय था। वे शनिवार को कांस्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित मुफ़्ती मुहम्मद किफायतुल्लाह देहलवी के जीवन और योगदान पर दो-दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि हमारे बुज़ुर्गों का रुख ठोस तर्कों और दस्तावेजो पर आधारित था। आज कुछ नौजवान मौजूदा हालात देखकर यह समझ बैठते हैं कि उन्होंने गलत रास्ता चुना, लेकिन मैं इससे सहमत नहीं। उनका फैसला बिल्कुल सही था दुर्भाग्य से उसे लागू नहीं किया गया।
अगर उनकी प्रस्तावित राह पर पूरा देश एकजुट होता, तो आज परिस्थितियां कहीं बेहतर होतीं। मुफ़्ती मुहम्मद किफायतुल्लाह देहलवी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी ने कहा कि सुभाष चंद्र बोस उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का बहादुर नेता बताते थे। उन्होंने जामिअत की वैश्विक दृष्टि और दबे-कुचलों के लिए उसकी निरंतर लड़ाई की प्रशंसा की। अंतिम सत्र की अध्यक्षता कर रहे मुफ़्ती मोहम्मद राशिद आजमी ने कहा कि मुफ्ती किफायतुल्लाह साहिब एक ऐसे व्यक्तित्व थे जिन्हें सभी समुदायों ने सम्मान दिया। फिलिस्तीन के पक्ष में उनका दृढ़ रुख और अन्याय के खिलाफ खड़े होने का साहस आज भी प्रेरक है।

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