ममता ने आयोग और भाजपा के बीच साठगांठ का आरोप लगाया
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने निर्वाचन आयोग और भाजपा पर मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह कदम 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को लाभ पहुंचाने के लिए किया गया है। बनर्जी ने कहा कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर उच्चतम न्यायालय से गुहार लगाई है और 6 मार्च से धरना देने की घोषणा की है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने को लेकर सोमवार को निर्वाचन आयोग और भाजपा पर हमला बोला। बनर्जी ने दोनों पर साठगांठ कर वास्तविक मतदाताओं को मताधिकार से वंचित करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह कदम 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा को लाभ पहुंचाने और लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश है। होली कार्यक्रम में बोलते हुए बनर्जी ने आरोप लगाया कि आगामी विधानसभा चुनावों में भाजपा की मदद के लिए ये साजिश रची गई है। पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद 28 फरवरी को मतदाता सूची के प्रकाशन के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में बनर्जी ने दावा किया कि चुनावों को अपने पक्ष में मोड़ने के लिए भाजपा और आयोग द्वारा जानबूझकर नाम हटाए गए हैं।
तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ने आरोप लगाया, ‘निर्वाचन आयोग ने जानबूझकर असली मतदाताओं के नाम हटा दिए हैं। मैं स्तब्ध हूं। यह बहुत दुखद और अमानवीय स्थिति है।’ एसआईआर के बाद मतदाता सूची में 63.66 लाख नाम हटाए गए, जो कुल मतदाताओं का 8.3 प्रतिशत है। एसआईआर के बाद राज्य में मतदाताओं की संख्या घटकर लगभग 7.04 करोड़ रह गई है। इसके अलावा 60.06 लाख से अधिक मतदाताओं को विचाराधीन श्रेणी में रखा गया है, जिनकी आने वाले हफ्तों में जांच की जाएगी। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि कई तृणमूल-शासित क्षेत्रों में 10 से 30 हजार तक नाम हटाए गए। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने इस मुद्दे पर सर्वोच्च न्यायालय से लेकर निर्वाचन आयोग तक गुहार लगाई है। ममता बनर्जी ने 6 मार्च से ‘आयोग-भाजपा गठजोड़’ के खिलाफ धरना देने की घोषणा की और कहा कि बंगाल की जनता वास्तविक मतदाताओं के अधिकार छीनने की कोशिशों का करारा जवाब देगी।
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