जन विश्वास विधेयक को लोकसभा की मंजूरी
लोकसभा ने जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित किया। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने बताया कि इसका उद्देश्य भरोसे की संस्कृति बनाना है। यह कानून छोटी-मोटी गलतियों पर चेतावनी और दंड के प्रावधान के साथ सुधारने का मौका देगा। इस कानून से 1,000 से अधिक प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाया जाएगा।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। लोकसभा ने बुधवार को जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। इसके पहले सदन ने विपक्ष के संशोधनों को खारिज किया। सदन में विधेयक पर चर्चा का जबाब देते हुए केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि जन विश्वास विधेयक का उद्देश्य भरोसे की एक संस्कृति बनाना है। विश्वास की संस्कृति भय के आधार पर नहीं, बल्कि कर्तव्य के आधार पर बनेगी। उन्होंने कहा कि इस प्रस्तावित कानून को इसी सोच के साथ लाया जा रहा है।गोयल ने कहा कि प्रस्तावित कानून में सबसे बड़ा यह प्रावधान किया गया है कि यह आपको सुधरने का मौका देता है।
उन्होंने कहा कि कई ऐसे प्रावधान हैं, जिनमें छोटी-मोटी गलती होने पर पहले चेतावनी दी जाएगी। दूसरी बार गलती की तो दंड लगेगा और फिर यदि कुछ और गंभीर गलती करते हैं तो तीसरी बार दंड बढ़ जाएगा और अदालती कार्यवाही का सामना करना पड़ेगा। इसे चरणबद्ध कार्रवाई कहा जाता है और इससे व्यक्ति को सुधरने का मौका मिलेगा।गोयल ने कहा कि यह प्रस्तावित कानून दर्शाता है कि इस कर्तव्य भावना के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत बनाने के लिए हम सब तत्पर हैं। हमारी कोशिश है कि दंड देने वाली गुलामी की जो मानसिकता थी, उसे न्याय में कैसे बदला जाए। सरकार का यह प्रयास है कि जानबूझकर की गई गलती, या किसी दूसरे को कोई नुकसान पहुंचाने वाली गलती को छोड़कर छोटे-मोटे अपराध में दंड से निजात दिलाया जाए।प्रस्तावित कानून के जरिये करीब 1,000 प्रावधानों को अपराध की श्रेणी से हटाने और उनका सरलीकरण कर आम लोगों और छोटे उद्यमों को राहत देने का काम किया जा रहा है। यानी एक हजार से अधिक छोटी-मोटी गलतियों पर अब लोगों को अदालत नहीं जाना पड़ेगा और उन्हें शर्मिंदगी नहीं झेलनी होगी या तकलीफ नहीं होगी।गौरतलब है कि वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले वर्ष 18 मार्च को जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) विधेयक, 2025 को लोकसभा में पेश किया था, जिसे प्रवर समिति को भेजा गया था। समिति की सिफारिशों को शामिल करके यह विधेयक सदन में लाया गया।--विपक्षी दलों ने विधेयक की आलोचना कीचर्चा के दौरान कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों के सांसदों ने जन विश्वास विधेयक को जन के साथ विश्वासघात विधेयक करार देते हुए इसे संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेजने की मांग की। कांग्रेस सांसद प्रशांत पडोले ने आरोप लगाया कि सरकार मनी माइंडेड है, जो सिर्फ पूंजीपतियों का ध्यान रखती है। राष्ट्रीय जनता दल के सांसद अभय कुमार सिन्हा ने कहा कि जन विश्वास विधेयक असल में पूंजीपति विश्वास विधेयक है, जिससे सरकार की कॉरपोरेट मानसिकता वाला चरित्र उजागर होता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विधेयक को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा जाना चाहिए। लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के नेता राजेश वर्मा ने कहा कि यह विधेयक गुलामी की जंजीरों को तोड़ने वाला है। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने कहा कि यह विधेयक भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मददगार साबित होगा। उन्होंने कहा कि सुनियोजित अपराध को किसी भी तरह से अपराध की श्रेणी से बाहर नहीं किया गया है, सिर्फ यह प्रयास किया गया है कि मामूली गलतियों को अपराध न माना जाए।
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