
दुनिया में पहला गणराज्य देने वाले हम थे : कृष्ण गोपाल
दिल्ली विश्वविद्यालय और विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा भारत बौद्धिक्स पुस्तक शृंखला का विमोचन हुआ। इस अवसर पर डॉ. कृष्ण गोपाल ने भारतीय सभ्यता की प्राचीनता और विश्व में भारत के योगदान की चर्चा की। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित पुस्तकों के विमोचन की सराहना की।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। दिल्ली विश्वविद्यालय एवं विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा भारत बौद्धिक्स पुस्तक शृंखला का विमोचन गुरुवार को डीयू के वाइस रीगल लॉज में हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि दुनिया को पहला गणराज्य देने वाले हम थे। दुनिया को अंक देने वाले हम थे। उन्होंने कहा कि भारतीय सभ्यता 8 हजार वर्ष से भी अधिक पुरानी है। पूरे यूरोप को सिविलाइजेशन ग्रीक से मिला और ग्रीक को भारत से मिला। उन्होंने दिल्ली में लौह स्तंभ का उदाहरण देते हुए कहा कि हजारों डिग्री तापमान पर धातु को पिघलाकर इस स्तम्भ का निर्माण किया गया था।
यानि उस समय में कोई तो इतनी बड़ी फर्नेस भारत में रही होगी। उन्होंने कहा कि दुनिया में पहली डेंटल सर्जरी भारत में 7 हजार साल पहले हुई। इस कार्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा आधारित 21 पुस्तकों का हिन्दी और अंग्रेजी में विमोचन किया गया। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि भारतीय शिक्षा नीति कहती है कि हम केवल ग्लोबल नॉलेज के कंज़्यूमर न रहें, बल्कि प्रोड्यूसर बनें। उन्होंने कहा कि देश के एक कोने में डीयू में बैठकर जिस प्रकार यहां के शिक्षकों ने भारतीय ज्ञान परंपरा पर ये पुस्तकें लिखी है उसके लिए डीयू बधाई का पात्र है। शिक्षा मंत्री ने डीयू में हो रहे शोध कार्य के लिए भी डीयू को बधाई दी। डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि भारत हजारों साल विश्व की आर्थिक राजधानी रहा है। उसे समझने के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित ऐसी पुस्तकों का पढ़ा जाना जरूरी है।

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