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बुलेट ट्रेन परियोजना का भूमि अधिग्रहण गुजरात में पूरा

-14 सितंबर, 2017 को अहमदाबाद में हुआ था परियोजना का शुभारंभ -2026 तक सूरत

बुलेट ट्रेन परियोजना का भूमि अधिग्रहण गुजरात में पूरा
हिन्दुस्तान टीम,नई दिल्लीMon, 09 Oct 2023 07:01 PM
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-14 सितंबर, 2017 को अहमदाबाद में हुआ था परियोजना का शुभारंभ
-2026 तक सूरत और बिलिमोरा के बीच बुलेट ट्रेन का चलाने का लक्ष्य

अहमदाबाद, एजेंसी। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए गुजरात में 100 प्रतिशत भूमि अधिग्रहण पूरा हो गया है। नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) ने सोमवार को यह जानकार दी।

निगम ने एक विज्ञप्ति में कहा कि गुजरात में जमीन का आखिरी टुकड़ा सितंबर में सूरत जिले के कथोर गांव में अधिग्रहित किया गया था। कुल मिलाकर, परियोजना के लिए गुजरात के आठ जिलों में 951.14 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण करने की आवश्यकता है। नवीनतम अधिग्रहण के साथ, गुजरात, महाराष्ट्र और केंद्र शासित प्रदेश दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव में परियोजना के लिए 99.95 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण किया गया है।

एनएचएसआरसीएल ने कहा कि पड़ोसी महाराष्ट्र में परियोजना के लिए अधिग्रहित 429.71 हेक्टेयर में से 99.83 प्रतिशत प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। जबकि यूटी में कुल 7.90 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की गई थी। गुजरात में अहमदाबाद में 133.29 हेक्टेयर, खेड़ा में 110.25 हेक्टेयर, आनंद में 52.59 हेक्टेयर, वडोदरा में 142.30 हेक्टेयर, भरूच में 140.32 हेक्टेयर, सूरत में 160.52 हेक्टेयर और वलसाड में 88.93 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया।

परिचालन नियंत्रण केंद्र अहमदाबाद के साबरमती में स्थित होगा। इसके तीन डिपो होंगे, दो गुजरात (सूरत और साबरमती) और एक महाराष्ट्र (ठाणे) में स्थापित होगा। सरकार का लक्ष्य 2026 तक दक्षिण गुजरात में सूरत और बिलिमोरा के बीच बुलेट ट्रेन का पहला चरण चलाने का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके जापानी समकक्ष शिंजो आबे ने 14 सितंबर, 2017 को अहमदाबाद में इस परियोजना का शुभारंभ किया। पूरा 508 किलोमीटर का मार्ग 3-3.5 घंटे में तय होने की उम्मीद है।

जापान की शिंकानसेन तकनीक का उपयोग करके मुंबई और अहमदाबाद के बीच हाई-स्पीड रेल लाइन बनाई जा रही है। इस परियोजना का लक्ष्य उच्च-आवृत्ति जन परिवहन प्रणाली बनाना है। इस परियोजना को जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (जेआईसीए) द्वारा जापान से 88 हजार करोड़ रुपये के आसान ऋण के साथ वित्त पोषित किया गया है। 1.10 लाख करोड़ रुपये की इस परियोजना के 2022 तक पूरा होने की उम्मीद थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण में बाधाओं का सामना करना पड़ा।

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