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केरल : भ्रष्टाचार में आठ लोगों को 21 साल सश्रम कारावास

केरल : भ्रष्टाचार में आठ लोगों को 21 साल सश्रम कारावास

संक्षेप: तिरुवनंतपुरम की सतर्कता अदालत ने सिल्क हैंडलूम सोसायटी के गबन मामले में 8 लोगों को 21 साल की कठोर सजा सुनाई। आरोपियों ने जाली दस्तावेजों के माध्यम से 1 करोड़ 15 लाख रुपये की हेराफेरी की। उन्हें 1 करोड़ 17 लाख रुपये का जुर्माना भी दिया गया है।

Sat, 1 Nov 2025 04:31 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केरल की सिल्क हैंडलूम सोसायटी में किया एक करोड़ से अधिक का गबन तिरुवनंतपुरम सतर्कता अदालत ने दोषियों पर भारी अर्थदंड भी लगाया तिरुवनंतपुरम, एजेंसी। सतर्कता अदालत ने गबन के एक बड़े मामले में 8 लोगों को 21 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। भ्रष्टाचार का यह मामला इंटीग्रेटेड सिल्क हैंडलूम वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़ा है। सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (वीएसीबी) ने शनिवार को यह जानकारी दी। वीएसीबी के अनुसार, बलरामपुरम स्थित तिरुवनंतपुरम तालुक इंटीग्रेटेड सिल्क हैंडलूम वीवर्स कोऑपरेटिव सोसाइटी को रेशम हथकरघा उद्योग के विकास के लिए अक्टूबर 2009 से मार्च 2010 के बीच राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (एनसीडीसी) से दो करोड़ रुपये का ऋण मिला था।

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वीएसीबी की जांच से पता चला है कि आरोपियों ने जाली दस्तावेज तैयार किए और स्वीकृत ऋण से 1 करोड़ 15 लाख 45 हजार 612 रुपये की हेराफेरी की। तिरुवनंतपुरम सतर्कता अदालत के न्यायाधीश मनोज ए ने शुक्रवार को समिति के सचिव मजीठा, अध्यक्ष सुरेंद्रन, बोर्ड के सदस्य विजयकुमारी, सुरेश, शिवराजन, मनियन नादर, बिजित कुमार और मुख्य प्रवर्तक मोहनन को दोषी पाया। उन्हें विभिन्न धाराओं के तहत कुल 21 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। साथ ही सामूहिक रूप से 1 करोड़ 17 लाख 85 हजार 612 रुपये और 14 लाख 73 हजार 201 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने फैसला सुनाया कि सजा एक साथ चलेंगी। वीएसीबी के अनुसार, जांच से पता चला है कि आरोपियों ने सदस्यों की संख्या बढ़ाकर दिखाने के लिए सदस्यता रजिस्टर में हेरफेर किया और ऋण प्राप्त करने के लिए एक गलत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत की। बाद में उन्होंने धन का दुरुपयोग करने के लिए फर्जी खरीद रिकॉर्ड बनाए। वीएसीबी ने कहा कि आरोपियों में से एक बोर्ड के सदस्य गोपाल पणिक्कर का जांच के दौरान निधन हो गया। पूर्व लोक अभियोजक और वर्तमान कानूनी सलाहकार रंजीत कुमार एलआर एवं लोक अभियोजक वीना सतीसन मामले की सुनवाई के दौरान सतर्कता विभाग की ओर से पेश हुए।