किसानों की आय बढ़ा रही है पेड़ आधारित खेती
नई दिल्ली में ईशा फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे कावेरी कॉलिंग अभियान का उद्देश्य पेड़ आधारित खेती से किसानों को लाभ पहुंचाना और पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना है। तमिलनाडु के किसान वल्लुवन ने अपनी आय छह गुना बढ़ाने का अनुभव साझा किया। 13.4 करोड़ पेड़ लगाए जा चुके हैं और किसानों को तकनीकी सहायता मिल रही है।
नई दिल्ली, प्रमुख संवाददाता। राजधानी में ईशा फाउंडेशन द्वारा चलाए जा रहे कावेरी कॉलिंग अभियान के तहत पेड़ आधारित खेती से किसानों को हो रहे फायदे के बारे में बताने व पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से इंडिया हैबिटेट सेंटर में आयोजित प्रेसवार्ता में किसान व इस प्रोजेक्ट के निदेशक ने अपने विचार रखे। तमिलनाडु के किसान वल्लुवन ने कहा है कि पेड़ आधारित और बहुफसली खेती किसानों को लगातार मुनाफा दे रही है। कभी नारियल की पारंपरिक खेती में नुकसान झेलने वाले वल्लुवन ने अब अपनी आय छह गुना तक बढ़ा ली है। संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) से सम्मानित वल्लुवन ने बताया कि कम जुताई, मल्चिंग और कवर क्रॉपिंग जैसी तकनीकों ने खेती की लागत घटाने और मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में बड़ी भूमिका निभाई।
किसानों की आय में वृद्धि
वल्लुवन ने बताया कि उन्होंने अपने नारियल आधारित एकल खेती मॉडल को बहुस्तरीय ‘फूड फॉरेस्ट’ में बदल दिया। अब उनके खेत में नारियल के साथ काली मिर्च, फलदार पेड़, इमारती लकड़ी और कई अन्य फसलें उगाई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इससे उर्वरकों और कीटनाशकों पर निर्भरता कम हुई है और खेत सूखा तथा बाढ़ जैसी परिस्थितियों का सामना करने में भी सक्षम बना है। कई अन्य किसान हैं जिनकी आय में काफी वृद्धि हुई है।
मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार
वल्लुवन ने बताया कि मिट्टी में जैविक कार्बन का स्तर बढ़ने से खेत की उत्पादकता में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि पहले खेती से सीमित आय होती थी, लेकिन अब आय कई गुना बढ़ चुकी है।
कावेरी कॉलिंग अभियान का उद्देश्य
सेव सॉयल - कावेरी कॉलिंग अभियान से जुड़े प्रोजेक्ट डायरेक्टर आनंद एथिराजालु ने कहा कि यह केवल पेड़ लगाने का अभियान नहीं, बल्कि खेती के तरीके में बड़ा बदलाव है। उन्होंने कहा कि अब तक 13.4 करोड़ पेड़ लगाए जा चुके हैं और 2.6 लाख किसानों को वृक्ष आधारित खेती अपनाने में सहायता दी गई है।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार की नीतियां और किसान साथ आएं तो मिट्टी को पुनर्जीवित करने, जल संसाधनों को बचाने और ग्रामीण आजीविका मजबूत करने का बड़ा लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। अभियान का उद्देश्य कावेरी नदी के जल प्रवाह को बनाए रखना और किसानों की आय बढ़ाना है। उत्तर भारत में इस तरह की योजनाओं को संचालित करने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अभी यहां इस तरह की योजना संचालित करने की योजना नहीं है।
किसानों को तकनीकी सहायता
आनंद ने बताया कि अभियान के तहत किसानों को कम कीमत पर पौधे उपलब्ध कराए जा रहे हैं। तमिलनाडु में एशिया की सबसे बड़ी एकल-स्थल नर्सरी स्थापित की गई है, जहां महिलाओं द्वारा हर साल लाखों पौधे तैयार किए जाते हैं। इसके अलावा किसानों को तकनीकी सलाह, प्रशिक्षण और डिजिटल सहायता भी दी जा रही है।
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