कर्नाटक में नेतृ्त्व परिवर्तन को लेकर खींचतान बरकरार
कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन के लिए खींचतान जारी है। कांग्रेस ने कहा है कि उसकी प्राथमिकता राज्यसभा चुनाव हैं, जो 18 जून को होंगे। पार्टी ने सिद्धारमैया के साथ एक और बैठक की योजना बनाई है। डीके शिवकुमार खुद को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं, जबकि सिद्धारमैया अपने कार्यकाल को पूरा करने का दावा कर रहे हैं।

नई दिल्ली, विशेष संवाददाता। कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर खींचतान जारी है। करीब छह घंटे तक चली मैराथन बैठक में सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। पार्टी ने साफ कहा कि उसकी पहली प्राथमिकता राज्यसभा चुनाव हैं। ऐसे में नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर पार्टी का शीर्ष नेतृत्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के साथ जल्द एक और दौर की बैठक करेगा।
राज्यसभा चुनाव की प्राथमिकता
कर्नाटक में राज्यसभा की चार सीट के लिए 18 जून को चुनाव है। कांग्रेस को तीन सीट जीतने की उम्मीद है। जबकि एक सीट भाजपा को मिलेगी। भाजपा के साथ जेडीएस भी उम्मीदवार उतारती है, तो तीसरी सीट के लिए मुकाबला कड़ा हो जाएगा। इसलिए, पार्टी फिल्हाल नेतृत्व परिवर्तन का कोई जोखिम नहीं उठाना चाहती है।
बैठक के परिणाम
बैठक के बाद पार्टी महासचिव केसी वेणुगोपाल ने कहा कि राज्यसभा और विधानसभा परिषद के चुनाव पर चर्चा हुई है। उम्मीदवारों का ऐलान जल्द कर दिया जाएगा। उन्होंने यह कहते हुए राज्य में नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि मीडिया जो कयास लगा रहे हैं, उसमें कोई सच्चाई नहीं है।
राहुल गांधी की भूमिका
पार्टी सूत्रों का कहना है कि नेतृत्व परिवर्तन के मुद्दे पर राहुल गांधी सीधे मुख्यमंत्री सिद्धारमैया से बात करेंगे। मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए तैयार होते हैं, तो ऐसी स्थिति में पार्टी उनके बेटे यतींद्रे सिद्धारमैया को राज्य सरकार में मंत्री बनाकर उन्हें राज्यसभा के साथ केंद्रीय संगठन में भी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
सिद्धारमैया का महत्व
कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया पार्टी के सबसे प्रमुख ओबीसी चेहरों में एक हैं। सिद्धारमैया दिल्ली में आते हैं, तो इससे राहुल गांधी के सामाजिक न्याय और जाति जनगणना के मुद्दे को धार मिलेगी। इसके साथ वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में दक्षिण भारत में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
डीके शिवकुमार की मांग
दरअसल, कर्नाटक में कांग्रेस सरकार के 20 मई को तीन वर्ष पूरे हो गए। ऐसे में उप मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ढाई ढाई वर्ष का फार्मूले का हवाला देते हुए खुद को मुख्यमंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं। वहीं, सिद्धारमैया कई बार दोहरा चुके हैं कि वह अपना कार्यकाल पूरा करेंगे। नेतृत्व परिवर्तन को लेकर खींचतान बरकरार है।
सामान्य प्रश्न
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