
कर्नाटक हाईकोर्ट ने भूमि मालिकों को दी बड़ी राहत
कर्नाटक उच्च न्यायालय ने अनिवार्य अधिग्रहण से प्रभावित भूमि मालिकों को राहत देते हुए सुप्रिया एस. शेट्टी की याचिका पर फैसला सुनाया। याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार के लिए मुआवजे पर आयकर काटने को चुनौती दी गई थी। अदालत ने पहले के फैसले का हवाला देते हुए याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला दिया।
अनिवार्य अधिग्रहण से प्रभावित भूमि मालिकों को बड़ी राहत देते हुए कर्नाटक हाईकोर्ट ने सुप्रिया एस. शेट्टी द्वारा दायर एक रिट याचिका को स्वीकार करते हुए उसके पक्ष में फैसला सुनाया। याचिका में राष्ट्रीय राजमार्ग विस्तार के लिए दिए गए मुआवजे पर आयकर काटे जाने को चुनौती दी गई थी। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति एस. आर. कृष्णकुमार ने की। याचिकाकर्ता की ओर पेश अधिवक्ता धनंजय ने कहा कि न्यायमूर्ति कृष्णकुमार ने 2022 में एक फैसले में कहा था कि केआईएडीबी अधिग्रहण में आरएफसीटीएलएआरआर ढांचे के तहत निर्धारित मुआवजे पर टीडीएस या आयकर नहीं लगाया जा सकता। इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया था, जिससे यह पूरे कर्नाटक में लागू हो गया।

इसी आधार पर वर्तमान मामले में अदालत ने याचिकाकर्ता के पक्ष में फैसला सुनाया। दरअसल्र, याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए अधिवक्ता के. वी. धनंजय ने बताया कि याचिकाकर्ता और उनके पति ने एक वेलनेस रिसॉर्ट परियोजना के लिए लगभग दो दशकों में तेनकुलिपाडी गांव में लगभग 17.5 एकड़ जमीन जुटाई थी। उनकी योजना 2020 में तब बाधित हो गई जब भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने राष्ट्रीय राजमार्ग-169 के चौड़ीकरण के लिए उनकी 33.50 सेंट भूमि का अधिग्रहण कर लिया। मुआवजा राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम और आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम के तहत दिया गया था, लेकिन अधिकारियों ने 16 लाख रुपये से अधिक की राशि टीडीएस के रूप में काट ली, जबकि आरएफसीटीएलएआरआर अधिनियम की धारा 96 के तहत ऐसे मुआवजे को आयकर से छूट दी गई है।

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