कर्नाटक में नफरती भाषण पर 10 साल तक की कैद
कर्नाटक सरकार ने विधानसभा में घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध (रोकथाम) विधेयक पेश किया है। इसमें जुर्माना एक लाख रुपये और 10 साल तक की सजा का प्रावधान है। यह विधेयक नफरती भाषण को किसी व्यक्ति या समूह के खिलाफ किया गया बोल, लिखित या अन्य किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह मानता है।

कर्नाटक सरकार ने बुधवार को विधानसभा में कर्नाटक घृणास्पद भाषण और घृणा अपराध (रोकथाम) विधेयक पेश किया। इस विधेयक में एक लाख रुपये तक के जुर्माने और 10 साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है। मंत्रिमंडल ने चार दिसंबर को इस विधेयक को मंजूरी दी थी। विधेयक के अनुसार किसी भी प्रकार का ऐसा व्यक्तव्य जो बोला गया हो, लिखा हो, इशारा किया हो, प्रतीकों का इस्तेमाल, इलेक्ट्रॉनिक संचार के माध्यम या अन्य तरीके से किसी व्यक्ति, वर्ग, समूह के प्रति चोट पहुंचाता हो और पक्षपात को दर्शाता हो तो उसे नफरती (घृणास्पद) भाषण माना जाएगा। धर्म, जाति, समुदाय, लैंगिक पहचान, यौन को लेकर टिप्पणी, जन्मस्थान, निवास स्थान, भाषा, दिव्यांगता या जनजाति के आधार पर किसी भी प्रकार का पूर्वाग्रह भी घृणास्पद भाषण की श्रेणी में रखा गया है।
वहीं, घृणा अपराध को नफरती भाषण को फैलाने के रूप में परिभाषित किया गया है। इसमें नफरती भाषण को तैयार करना, प्रकाशित करना या प्रसारित करना शामिल है। विधेयक में प्रावधान है कि घृणा अपराध करने वाले किसी भी व्यक्ति को कम से कम एक वर्ष कारावास की सजा दी जाएगी। इसे सात वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है और उस पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। इसके अलावा, दोबारा या बार-बार किए गए ऐसे अपराध के लिए सजा कम से कम दो वर्ष होगी, जिसे 10 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। आरोपी पर एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
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