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कपिल मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उठाया विशेषाधिकार उल्लंघन का मुद्दा

कपिल मिश्रा ने विधानसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर उठाया विशेषाधिकार उल्लंघन का मुद्दा

संक्षेप:

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता दिल्ली सरकार में विधि एवं न्याय, श्रम, रोजगार, विकास,

Feb 03, 2026 05:40 pm ISTNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता दिल्ली सरकार में विधि एवं न्याय, श्रम, रोजगार, विकास, कला, संस्कृति एवं भाषा तथा पर्यटन मंत्री कपिल मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को एक पत्र लिखकर विधानसभा के विशेषाधिकारों का गंभीर उल्लंघन का मुद्दा उठाया है। उन्होंने पत्र के माध्यम से अवगत कराया है कि इकबाल सिंह द्वारा की गई शिकायत तथा उसके आधार पर पंजाब पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर सहित की गई कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 361 ए के अंतर्गत संवैधानिक संरक्षण की अवहेलना है तथा यह विधानसभा के विशेषाधिकारों का गंभीर उल्लंघन है। कपिल मिश्रा ने अपने पत्र में कहा है कि विधानसभा की कार्यवाही के पर्याप्त रूप से सत्य विवरण के प्रकाशन के संबंध में आपराधिक कार्यवाही आरंभ किया जाना विधायिका की गरिमा, स्वतंत्रता एवं अधिकार में हस्तक्षेप के समान है।

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अतः उन्होंने इस पूरे प्रकरण को अध्यक्ष द्वारा संज्ञान में लेकर विशेषाधिकार समिति को संदर्भित करने का अनुरोध किया है, ताकि समुचित जांच एवं आवश्यक कार्रवाई की जा सके। अपने पत्र में कपिल मिश्रा ने संविधान के अनुच्छेद 361 ए का उल्लेख करते हुए कहा कि संसद अथवा राज्य विधानमंडल की कार्यवाही के पर्याप्त रूप से सत्य विवरण के प्रकाशन के लिए किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही नहीं की जा सकती, जब तक यह सिद्ध न हो कि उक्त प्रकाशन दुर्भावना से किया गया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उक्त अनुच्छेद में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह संवैधानिक संरक्षण संसद अथवा राज्य विधानमंडल के किसी भी सदन की गुप्त बैठकों की कार्यवाही से संबंधित रिपोर्टों के प्रकाशन पर लागू नहीं होता। मिश्रा ने पत्र में स्मरण कराया कि 6 जनवरी 2026 को सदन की कार्यवाही के दौरान नेता प्रतिपक्ष आतिशी द्वारा सिख गुरुओं के विरुद्ध आपत्तिजनक एवं अपमानजनक टिप्पणी किए जाने से सदन में व्यवधान उत्पन्न हुआ था। इसके बाद 9 जनवरी 2026 को मुख्य सचेतक अभय वर्मा द्वारा सदन को अवगत कराया गया कि जालंधर पुलिस द्वारा उनके विरुद्ध यह आरोप लगाते हुए एफआईआर दर्ज की गई है कि उन्होंने विधानसभा कार्यवाही का एक कथित रूप से संपादित (डॉक्टर्ड) वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है।