
आतंकियों से लड़ना ‘जिहाद’ होता है : महमूद मदनी
बयान पर विवाद होने के बाद जमीयत अध्यक्ष ने कहा, यह शब्द पाक होता शब्द पाक होता
बयान पर विवाद होने के बाद जमीयत अध्यक्ष ने कहा, यह शब्द पाक होता है -बोले, कुछ मंत्रियों ने तय कर दिया है कि कोई भी नकारात्मक बात ‘जिहाद’ है मेरठ, एजेंसी। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने ‘जिहाद’ को लेकर दिए गए बयान पर विवाद होने के बाद मंगलवार को कहा कि इस शब्द को कुछ नेताओं और सरकारों ने नकारात्मक तरीके से गलत बातों से जोड़ दिया है। जबकि असल में यह पवित्र शब्द है। वास्तव में आतंकवादियों से लड़ने को ‘जिहाद’ कहते हैं। जमीयत अध्यक्ष ने कहा कि इस शब्द का इस्तेमाल योजना के हिसाब से किया जा रहा है।
देश में मुसलमानों के खिलाफ बातें फैलाने के लिए ‘लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद और वोट जिहाद’ जैसे कई शब्द बनाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारों ने तय किया है कि अगर मुसलमानों से जुड़ी कोई भी नकारात्मक बात सामने आती है तो उसे ‘जिहाद’ कहा जाएगा जबकि यह एक पवित्र शब्द है। हम जिहाद के असली मतलब के लिए लड़ रहे हैं। इसको लेकर फैले भ्रम पर सफाई देते हुए मदनी ने कहा कि हालांकि उनकी जिम्मेदारी थी कि उनके शब्दों को गलत न समझा जाए, लेकिन उन्हें अपने बयान में कोई गलत बात दिखाई नहीं देती। उन्होंने कहा भारत में ‘जिहाद’ के कई मतलब हैं। सबसे बड़ा जिहाद अपने मकसद को साफ रखना है। अगर नाइंसाफी हो तो उसके खिलाफ आवाज उठाना भी जिहाद है। उन्होंने कहा कि इसे आतंकवाद से जोड़ना गलत है। इसके बजाय, आतंकवादी के लिए सही शब्द ‘फसादी’ है। आतंकवादी इस्लामिक व्याख्याओं का गलत मतलब निकालते हैं और ‘फसाद’ फैलाते हैं। हमें इसके खिलाफ होना चाहिए। हम जिहाद को आतंकवाद से लड़ना मानते हैं। आतंकवादी ‘फसादी’ हैं और फसाद के खिलाफ लड़ने वाले हम लोग ‘जिहादी’ हैं। यह स्वत: मान लिया गया है कि सभी मुसलमान ‘जिहादी’ हैं और इसलिए ‘फसादी’ हैं। यह मेरी और संगठन के पदाधिकारियों, जिम्मेदार लोगों की जिम्मेदारी बन गई है कि हम समझाएं कि जिहाद असल में क्या है।

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