टैरिफ डील, बजट प्राथमिकताओं और बढ़ती हिंसा पर जमाअत-ए-इस्लामी हिंद की चिंता
नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने भारत-अमेरिका के कथित टैरिफ समझौते,

नई दिल्ली। प्रमुख संवाददाता जमाअत-ए-इस्लामी हिंद ने भारत-अमेरिका के कथित टैरिफ समझौते, केंद्रीय बजट 2026-27 की प्राथमिकताओं तथा देश में बढ़ती सांप्रदायिक और जाति-आधारित हिंसा पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। मीडिया को संबोधित करते हुए संगठन के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा कि संसद सत्र के दौरान भी टैरिफ डील के विवरण सार्वजनिक नहीं किए गए, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने आशंका जताई कि यदि भारत शुल्क दर घटाकर शून्य करता है और अमेरिका भारतीय निर्यात पर ऊंचा टैरिफ बनाए रखता है तो इसका असर किसानों, आजीविका और खाद्य सुरक्षा पर पड़ सकता है। केंद्रीय बजट पर उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय बढ़ाने के बावजूद रोजगार सृजन, सामाजिक क्षेत्र, असमानता और सार्वजनिक कर्ज जैसे मुद्दों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया।
स्वास्थ्य और शिक्षा पर खर्च राष्ट्रीय लक्ष्यों से कम बताया गया। उपाध्यक्ष मलिक मोतसिम खान ने धार्मिक अल्पसंख्यकों, दलितों और हाशिए के समूहों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की निंदा करते हुए जवाबदेही, सख्त कानूनी कार्रवाई और सामाजिक सद्भाव बढ़ाने की मांग की।
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