हर 12 दिन बाद मिट्टी में नमी की जानकारी मिलेगी
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने निसार सैटेलाइट के माध्यम से मिट्टी की नमी की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की है। यह सैटेलाइट हर 12 दिन में डेटा अपडेट करता है, जिससे किसानों को सिंचाई, सूखे के जोखिम और फसलों की सेहत के बारे में सही जानकारी मिलती है। यह जानकारी कृषि प्रबंधन में मददगार साबित होगी।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने शनिवार को बताया कि निसार सैटेलाइट भारत की भूमि की लगातार तस्वीरें ले रहा है। यह सैटेलाइट एस और एल बैंड तकनीक का उपयोग करके बहुत ही स्पष्ट और विस्तृत डाटा जुटाता है, जिसे हर 12 दिन में अपडेट किया जाता है। इसरो ने इस डाटा का उपयोग करके 100 मीटर की उच्च गुणवत्ता पर मिट्टी की नमी का पता लगाया है। मिट्टी की नमी कृषि और जल प्रबंधन के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है। इससे फसलों की सेहत, सिंचाई की आवश्यकता और सूखे के जोखिम का समय रहते पता चल जाता है। मिट्टी की नमी का यह डाटा देश के सभी अलग-अलग क्षेत्रों के लिए सटीक अनुमान देता है, जिसमें सिंचाई वाले मैदानी इलाके, बारिश पर निर्भर रहने वाले खेत और कम या बहुत अधिक बारिश वाले क्षेत्र शामिल हैं।
इसे तैयार करने के लिए स्पेस ऐप्लीकेशन सेंटर द्वारा विकसित एक खास वैज्ञानिक फॉर्मूले का उपयोग किया गया है, जो इसकी सटीकता को सुनिश्चित करता है। किसानों को योजना बनाने में आसानी निसार सैटेलाइट हर 12 दिन में दो बार जानकारी देने में सक्षम है। इससे मिट्टी की नमी में होने वाले बदलावों पर करीब से नजर रखी जा सकेगी। जल्दी-जल्दी मिलने वाली जानकारी से सिंचाई की योजना बनाने, सूखे से निपटने और किसानों को मौसम आधारित सलाह देने में बहुत मदद मिलेगी। यह जानकारी जिला स्तर और खेती से जुड़े समुदायों के लिए विशेष रूप से उपयोगी होगी। इसरो ने स्पष्ट किया कि इस डाटा को नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर में तैयार किया जाएगा और भूनिधि पोर्टल के माध्यम से किसानों, योजनाकारों, शोधकर्ताओं और सरकारी व निजी संस्थाओं तक आसानी से पहुंचाया जाएगा।
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