
पीएसएलवी विकास का 50 प्रतिशत हिस्सा उद्योगों को सौंपना चाहता इसरो
संक्षेप: इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी पीएसएलवी के विकास का 50 प्रतिशत हिस्सा उद्योग संघ को सौंपना चाहती है। उन्होंने बताया कि लगभग 450 उद्योग इसरो के अभियानों में योगदान दे रहे हैं। भारत वर्तमान में 56 उपग्रहों का संचालन कर रहा है, जिसकी संख्या बढ़ने की संभावना है।
इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने गुरुवार को कहा कि अंतरिक्ष एजेंसी ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी) के विकास का 50 प्रतिशत हिस्सा उद्योग संघ को हस्तांतरित करना चाहता है। घरेलू विमानन क्षेत्र, रक्षा और इंजीनियरिंग सेक्टर की क्षमता की सराहना करते हुए नारायणन ने कहा कि उद्योग संघ पहले से ही भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अभियानों के लिए लगभग 80 से 85 प्रतिशत प्रणालियों का योगदान दे रहे हैं। इसरो प्रमुख ने बेंगलुरु में इंडिया मैन्युफैक्चरिंग शो के दौरान कहा कि आज, जब आप भारत के अत्यधिक महत्वपूर्ण पीएसएलवी को देखते हैं, तो एचएएल और एलएंडटी के नेतृत्व वाले भारतीय संघ ने पहला रॉकेट तैयार कर लिया है।

हम इसकी संभवतः फरवरी तक शुरुआत करने जा रहे हैं। नारायणन ने कहा कि जब हम (भारतीय संघ द्वारा) दो प्रक्षेपणों में सफल हो जाएंगे, तो हमारी योजना पीएसएलवी विकास का कम से कम 50 प्रतिशत हिस्सा सीधे भारतीय उद्योग संघ को देने की है। उन्होंने बताया कि भारतीय उद्योग ने सबसे भारी संचार उपग्रह सीएमएस-03 मिशन में 80 प्रतिशत योगदान दिया। इसमें बाहुबली रॉकेट 'एलएमवी3-एम5' का उपयोग किया गया। 450 उद्योग कर रहे मदद नारायणन के अनुसार लगभग 450 उद्योग इसरो के अभियानों में योगदान दे रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा अंतरिक्ष क्षेत्र में सुधारों की घोषणा किए जाने से इन उद्योगों को बढ़ावा मिला है। इसरो प्रमुख ने कहा कि भारत वर्तमान में संचार, नौवहन और पृथ्वी के अवलोकन आवश्यकताओं को पूरा करने वाले 56 उपग्रहों का संचालन कर रहा है, जिनकी संख्या आने वाले दिनों में तीन से चार गुना तक बढ़ाई जाएगी।

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