इसरो पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान तकनीक पर काम कर रहा : नारायणन
पुणे में एक दीक्षांत समारोह के दौरान, इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि संगठन पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान तकनीक पर काम कर रहा है। यह तकनीक भारत की कम लागत में अंतरिक्ष पहुंच सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। गगनयान मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम का लक्ष्य 2027 रखा गया है।

पुणे, एजेंसी। इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने गुरुवार को कहा कि संगठन पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान तकनीक के विकास पर काम कर रहा है, जो अंतरिक्ष तक कम लागत में पहुंच सुनिश्चित करने की भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। पिंपरी-चिंचवड़ स्थित डी.वाई. पाटिल इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह के मौके पर नारायणन ने बताया कि यह कार्यक्रम अभी प्रायोगिक चरण में है। स्पेसएक्स जैसी निजी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं कि पुन: उपयोग योग्य प्रक्षेपण यान लॉन्च को अधिक किफायती बनाते हैं। हम फिलहाल इस तकनीक के विकास की दिशा में काम कर रहे हैं।
इसरो अध्यक्ष ने स्पष्ट किया कि भारत वैश्विक निजी प्रक्षेपण सेवा प्रदाताओं को अपने प्रतिद्वंद्वी के रूप में नहीं देखता। मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम गगनयान पर बात करते हुए नारायणन ने बताया कि इसका लक्ष्य वर्ष 2027 रखा गया है और इससे पहले तीन मानवरहित (अनक्रू) मिशन भेजे जाएंगे। हालांकि पहले मानवरहित मिशन की तारीख अभी तय नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने कहा कि मौजूदा वर्ष और अगला वर्ष दोनों को गगनयान वर्ष घोषित किया गया है और कार्य योजना के अनुसार आगे बढ़ रहा है।
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