जल अनुसंधान के क्षेत्र में मिलकर काम करेंगे केंद्र और इसरो
जल शक्ति मंत्रालय और इसरो ने जल संसाधन प्रबंधन के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी के उपयोग को बढ़ाने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत जलाशय निगरानी, जल-प्रसार आकलन, और जल गुणवत्ता आकलन सहित 24 अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम किया जाएगा।

नई दिल्ली, एजेंसी। जल शक्ति मंत्रालय और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने देश में जल संसाधन प्रबंधन के लिए उपग्रह प्रौद्योगिकी और अंतरिक्ष-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से सोमवार को एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौते के तहत जल संसाधन विभाग और इसरो जलाशय निगरानी, जल-प्रसार आकलन, नदी-प्रवाह विश्लेषण, उपग्रह-आधारित जल गुणवत्ता आकलन और जल निकायों में प्लास्टिक के कचरे के अत्यधिक मात्रा में फैलने पर अध्ययन सहित 24 प्रमुख अनुसंधान क्षेत्रों में संयुक्त रूप से काम करेंगे。
जल संरक्षण जन भागीदारी
केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी आर पाटिल ने कहा कि जल संबंधी चुनौतियों का समाधान प्रौद्योगिकी, नवाचार, पारंपरिक ज्ञान और जनभागीदारी के माध्यम से किया जाना चाहिए। पाटिल ने जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) अभियान के तीसरे चरण की भी शुरुआत की और जून 2026 से मई 2027 के बीच दो करोड़ जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण का लक्ष्य घोषित किया। उन्होंने कहा कि पिछले चरण में 1.5 करोड़ संरचनाओं के निर्माण का आंकड़ा पार हो चुका है।
इसरो का सहयोग
इसरो के अध्यक्ष और अंतरिक्ष विभाग के सचिव वी नारायणन ने कहा कि यह समझौता दोनों संगठनों के बीच सहयोग को और गहरा करेगा और जल प्रबंधन के लिए उपग्रह-आधारित अनुप्रयोगों के उपयोग को मजबूत करेगा। उन्होंने कहा कि आज अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी जल संसाधनों के अवलोकन, मूल्यांकन, पूर्वानुमान और प्रबंधन के लिए अभूतपूर्व क्षमता प्रदान करती है।
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