इजरायल के आर्थिक हालात पर भारी पड़ रहा युद्ध : रिपोर्ट
नोट: ईरान युद्ध वाली खबर के साथ ले सकते हैं। अब तक 138

नोट: ईरान युद्ध वाली खबर के साथ ले सकते हैं। अब तक 138 अरब डॉलर खर्च कर चुका है इजरायल
युद्ध का आर्थिक प्रभाव
युद्ध की वजह से शिक्षा और स्वास्थ्य के बजट में कटौती की आशंका
यरूशलेम, एजेंसी। इजरायल के कई मोर्चों पर युद्ध देश के आर्थिक हालात पर भारी पड़ रहे हैं। युद्ध की वजह से रक्षा बजट बढ़ रहा है, जबकि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में कटौती की आशंका पैदा हो रही है। बैंक ऑफ इजरायल ने यह चिंता जताई है।
गवर्नर अमीर यारोन के अनुसार 7 अक्तूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुए क्षेत्रीय संघर्षों में अबतक 138 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। हाल ही में हुई आर्थिक कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा, यह एक बहुत बड़ी रकम है, जो जीडीपी के 17 प्रतिशत से ज्यादा है।
ईरान के खिलाफ युद्ध का खर्च
वित्त मंत्रालय के शुरुआती अनुमान के अनुसार ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान पर 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने तक सरकार को अतिरिक्त 12 अरब डॉलर खर्च करने पड़े। अक्तूबर 2023 के बाद से रक्षा मंत्रालय का बजट दोगुने से अधिक हो गया है।
युद्ध की कोशिशों को सहारा देने के लिए, सरकार ने 2024 और 2025 में अंतरराष्ट्रीय बाजारों से भारी कर्ज लिया। हालात ऐसे हो गए हैं कि अब सार्वजनिक कर्ज जीडीपी का 69 प्रतिशत से अधिक हो गया है, जबकि युद्ध से पहले यह 60 प्रतिशत था। टैक्स और सामाजिक सुरक्षा में योगदान भी बढ़ गए हैं।
इजरायली लोगों की स्थिति
दोहरी कीमत चुका रहे इजरायली: विशेषज्ञ
यरूशलेम की हिब्रू यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर एस्टेबन क्लोर ने कहा कि इजरायली लोग युद्ध के लिए दोहरी कीमत चुका रहे हैं।
पहली कीमत सरकारी सामाजिक खर्च में कमी और सार्वजनिक सेवाओं में कम निवेश के रूप में चुकानी पड़ रही है, जो बजट में लगातार कई बार की गई कटौती का नतीजा है, जबकि कर्ज भी बढ़ रहा है। शिक्षा पर बुरा असर पड़ेगा, इंफ्रास्ट्रक्चर की गुणवत्ता गिरेगी और स्वास्थ्य व्यवस्था की परफॉर्मेंस भी खराब होगी।
दूसरी कीमत आर्थिक विकास के तौर पर चुकानी पड़ रही है। 2024 तक जीडीपी अपने 2022 के स्तर पर वापस आ गई थी और शानदार रफ्तार से बढ़ रही है। लेकिन अक्तूबर 2023 से हजारों रिजर्व सैनिकों को बुलाने का सिलसिला भी असर डाल रहा है।
सैलरी में कमी
लोगों की सैलरी कम हुई
इजरायल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट की इसी हफ्ते की सर्वे रिपोर्ट के अनुसार 31 प्रतिशत लोगों ने कहा कि 7 अक्तूबर 2023 के बाद से उनकी सैलरी या इनकम में कमी आई है। इस स्थिति का सबसे बुरा असर खुद का काम करने वालों और सबसे कम आय वाले कर्मचारियों पर पड़ रहा है। वित्त मंत्रालय में बजट की डिप्टी हेड ट्रॉमा इकॉनमी (सदमे वाली अर्थव्यवस्था) के खतरे के बारे में चेतावनी दी।
नेतन्याहू की योजनाएं
नेतन्याहू की सुपर-स्पार्टा बनने की चाहत
इजरायल के पीएम नेतन्याहू की चाहत सुपर स्पार्टा बनने की है। सितंबर 2025 में, उन्होंने कहा कि इजरायल के पास सुपर-स्पार्टा बनने के अलावा कोई चारा नहीं है। स्पार्टा प्राचीन ग्रीक का राज्य था जो पूरी तरह से युद्ध के लिए समर्पित था।
लेबनान में हिज्बुल्लाह के खिलाफ इजरायल के हमले और ईरान के साथ युद्ध को कैसे खत्म किया जाए, इस पर नेतन्याहू और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मतभेद सामने आ रहे हैं, ऐसे में इजराइली प्रधानमंत्री आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहे हैं। इजरायल धीरे-धीरे अमेरिका से मिलने वाली भारी-भरकम सैन्य मदद पर अपनी निर्भरता कम करेगा। इजरायल उन विकसित देशों में से एक है जहां असमानता बहुत अधिक है, और लंबे समय से चल रही जंग से हालात और बिगड़ रहे हैं। इजरायली नेशनल इंश्योरेंस इंस्टीट्यूट की ताजा स्टडी के मुताबिक, 2023 और 2024 के बीच गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले बच्चों का अनुपात 27.6 प्रतिशत से बढ़कर 28 प्रतिशत हो गया।
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